त्रिगर्त संस्कृत महाविद्यालय चामुंडा में हुआ संस्कृत दिवस का आयोजन
धर्मशाला : भाषा एवं संस्कृति विभाग के कांगड़ा कार्यालय ने आज त्रिगर्त संस्कृत महाविद्यालय नंदीकेश्वर धाम चामुंडा में जिला स्तरीय संस्कृत दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उपमंडलाधिकारी धर्मशाला धर्मेश रमोत्रा ने मुख्यातिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज की। इस मौके धर्मेश रमोत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति संस्कृत से पहचानी जाती है। संस्कृत को मृतप्राय भाषा कहना सरासर गलत है। हम यह भली-भांति जानते हैं कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन तथा उत्कृष्ट भाषा है। हम इस भाषा की महत्ता और विज्ञान को भी भली-भांति समझते हैं। संस्कृत भाषा में किसी प्रकार का दोष नहीं है लेकिन बदलते दौर में इसका प्रयोग अवश्य कम हुआ है तथा इस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है।
इस आयोजन में संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का आरंभ संस्कृत महाविद्यालय के तृतीय वर्ष के छात्रों ने कल्याण मंत्र के साथ किया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया साथ ही अंतिम वर्ष के ही छात्रों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का विधिवत रुप से शुभारंभ किया।
छात्रों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस मौके विद्यार्थियों ने वेद पाठ, गीतिका के साथ-साथ स्वरचित कविताएं भी प्रस्तुत कीं । लगभग 15 छात्रों और तीन अध्यापकों व अन्य कवियों ने अपनी -अपनी प्रस्तुतियां दीं। जिला भाषा अधिकारी कांगड़ा श्री सुरेश राणा ने उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद करते हुए इस तरह के आयोजन भविष्य में भी आयोजित करते रहने का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य कृष्ण दिक्षित, अश्वनी, विवेक, मनु, सचिन, करतार चंद्र शास्त्री, केवल सिंह व अन्य उपस्थित रहे।