रफाल विमान सौदे को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सरकार ने आज अदालत
को बताया रफाल विमान सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी
किये गये हैं और याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के आधार पर विमानों की खरीद के
खिलाफ याचिकायें रद्द करने के अदालती फैसले पर पुनर्विचार चाहते हैं।
रफाल
विमान सौदे को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सरकार ने आज अदालत को
बताया रफाल विमान सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी किये
गये हैं और याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के आधार पर विमानों की खरीद के खिलाफ
याचिकायें रद्द करने के अदालती फैसले पर पुनर्विचार चाहते हैं। अटार्नी
जनरल के वेणुगोपाल ने अदालत को बताआ कि इस संवेदनशील मामले की जांच जारी
है। अटार्नी जनरल ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जिन दस्तावेजों को अपना
आधार बनाया है, उन पर गोपनीय और वर्गीकृत लिखा था और इसलिए यह सरकारी
गोपनीयता कानून का उल्लंघन है।
रफाल विमान सौदे को लेकर दायर
पुनर्विचार याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सरकार ने
अदालत को बताया कि रफाल विमान सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से
चोरी किये गये हैं और याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के आधार पर विमानों की
खरीद के खिलाफ याचिकायें रद्द करने के अदालती फैसले पर पुनर्विचार चाहते
हैं। अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि यह पुनर्विचार याचिका और एक
अंग्रेज़ी अखबार में इस विषय पर प्रकाशित लेख चोरी किये गये दस्तावेजों पर
आधारित है। वेणुगोपाल ने कहा कि ऐसे लेखों का मकसद न्यायालय की कार्यवाही
को प्रभावित करना है और यह न्यायालय की अवमानना के समान है।
इस पर
अदालत ने भी कहा कि भूषण को सुनने का मतलब यह नहीं है कि शीर्ष अदालत रफाल
सौदे के दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर ले रही है। उन्होंने वेणुगोपाल से जानना
चाहा कि इस सौदे से संबंधित दस्तावेज चोरी होने के बाद सरकार ने क्या
कार्रवाई की। वेणुगोपाल ने अदालत को बताआ कि इस संवेदनशील मामले की जांच
जारी है। अटार्नी जनरल ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जिन दस्तावेजों को
अपना आधार बनाया है, उन पर गोपनीय और वर्गीकृत लिखा था और इसलिए यह सरकारी
गोपनीयता कानून का उल्लंघन है। वहीं, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आप
नेता संजय सिंह की दलीलें सुनने से इंकार कर दिया। अदालत ने उनके वकील से
कहा कि न्यायलय को लेकर संजय सिंह की टिप्पणियां बेहद अपमानजनक हैं।
गौरतलब
है कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल 14 दिसंबर को राफेल सौदे को लेकर दायर
सारी जनहित याचिकाएं खारिज करते हुए कहा था कि सरकार की निर्णय लेने की
प्रक्रिया पर संदेह करने की कोई ऐसी वजह नहीं है कि इस सौदे को निरस्त किया
जाए। इसके बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पुनर्विचार याचिका दायर कर कोर्ट से कहा था कि
मामले पर फिर से सुनवाई हो क्योंकि सरकार ने कुछ तथ्य छिपाए थे ।फिलहाल
अदालत ने सुनवाई 14 मार्च तक स्थगित कर दी है।