चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को महाराजा के पोते, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) सुखजीत सिंह और सिंथिया फ्रेडरिक के साथ मिलकर लिखी गई किताब ‘प्रिंस, पैट्रन एंड पैट्रिआर्क महाराजा जगतजीत सिंह ऑफ कपूरथला ’ का विमोचन किया।लेखकों के अलावा पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर भी इस अवसर पर उपस्थित थे जहां मुख्यमंत्री ने महाराजा को कपूरथला के आधुनिकीकरण के रचयिताओं में से एक बताया। उन्होंने याद किया कि कैसे महाराजा जगतजीत सिंह के साथ उनके अपने दादा भूपिंदर सिंह ने आधुनिकीकरण के माध्यम से पटियाला और कपूरथला को विश्व मानचित्र पर लाया। कपूरथला के तत्कालीन अनूठे शाही राजा के लिए लिखी गई किताब को एक पोते की ओर से एक सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए मुख्यमंत्री ने महाराजा की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करते हुए किस्सों से श्रोताओं को निहाल किया। मुख्यमंत्री ने, जब वह 6 वर्ष के थे, महाराजा जी के साथ हुई अपनी मुलाकात को याद किया। उन्होंने महाराजा जी के पोते ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह की वीरता को भी याद किया। मुख्यमंत्री ने इस किताब को ज्ञान का स्रोत बताते हुए कहा कि यह कपूरथला की रियासत के आखिरी राजा के बारे में नौजवान पीढ़ी के लिए ज्ञान हासिल करने हेतु एक उच्च दर्जे की किताब है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस परिवार के साथ ऐतिहासिक संबंधों को साझा करते हुए कहा कि ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह ने महाराजा जगतजीत सिंह के बहु-मुखी स्वभाव को बहुत प्रभावशाली ढंग से पेश किया है जोकि एक न्यायसंगत और प्रगतिशील शासक थे।उन्होंने कहा कि 1920 और 1930 के दशक यूरोप के सुनहरी वर्ष थे और कुछ भारतीय शासकों ने इस क्षेत्र का यह देखने के लिए दौरा किया कि वह अपने राज्य के भले के लिए पंजाब में क्या वापस ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराजा जगतजीत सिंह के साथ उनके परिवार के पिछली 12 पीढ़ीयों से सम्बन्ध है। उन्होंने कहा कि इस किताब में सुनहरी युग को नये दृष्टीकोण से ऐतिहासिक तथ्यों से आगे जाकर देखा गया है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि महाराजा जगतजीत सिंह एक विद्वान शासक थे जिन्होंने आधुनिकता को अपनाया और अपने पूर्वजों के रीति रिवाज़ों को कायम रखा। वह एक यात्री एवं अपने परिवार और लोगों के लिए एक दयालू व्यक्ति थे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि किताब के सभी 22 अध्याय उनके विभिन्न गुणों को दर्शाते हैं।कैप्टन अमरिन्दर ने ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह की सराहना की और ब्रिगेडियर सुखजीत द्वारा 1971 की भारत -पाक जंग के दौरान दिखाई गई बहादुरी, जिसके लिए उन्हें महावीर चक्कर के साथ सम्मानित किया गया, को पहचान प्रदान करने वाली पुस्तक में से एक पैरे को पढक़र सुनाया। मुख्यमंत्री ने सुखजीत सिंह के जंग में प्रेरणादायक नेतृत्व का जि़क्र किया जहां उन्होंने भारी तोपखाने और गोलाबारी के बीच मलकपुर में दुश्मन के टैंको पर कब्ज़ा करने हेतु चलाए अभियान के दौरान कौशल और साहस का प्रयोग किया। उन्होंने आगे बढक़र आठ टैंकों और कुछ पाकिस्तानी अफसरों के साथ टक्कर ली और उनको काबू किया था। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि सुखजीत सिंह ने सिद्धांतों के आधार पर सेना छोड़ दी थी।मुख्यमंत्री ने इस बात का खुलासा किया कि ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह ने उन्हें एक पत्र लिखा था जिसमें उन्हें सेना में शामिल होने की सलाह दी थी जब वह केवल 14 वर्ष के थे। उन्होंनेे कहा कि उन्होंने हमेशा उन्हें अपने भाई के रूप में देखा है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा, ‘‘हालांकि मैंने पहले ही सेना में शामिल होने का फैसला कर लिया था और पत्र प्राप्त करने के समय मुझे पता नहीं था कि ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह कौन हैं। मुझे सेना में शामिल होने के बाद उनके बारे में पता चला और तब से हम लगातार संपर्क में हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि किस्सों और इतिहास के अलावा यह पुस्तक लेखक के अपने दादा के साथ हुई कई मुलाकातों से परिपूर्ण है, जिसने उन्हें जीवन के कई पाठ पढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक आकर्षक ढंग से ब्रिटिश इंपीरियल इंडिया के काल को एक लोकतांत्रिककाल में परिवर्तित होते हुए दर्शाती है, जो 1872 से 1949 तक महाराजा जगतजीत सिंह के जीवन और समय के साथ मेल खाता था।कैप्टन अमरिंदर ने दोनों लेखकों की व्यापक शोध के लिए सराहना की, जो उन्होंने भारत और विदेशों दोनों में सबसे अधिक युगांतरकारी घटनाओं के विभिन्न आयामों का पता लगाने और पेश करने के लिए किया था और जिसके महाराजा जगतजीत सिंह साक्षी थे। उन्होंने ब्रिगेडीयर सुखजीत सिंह की उनकी सूक्ष्म समझ और लेखन कौशल से उनके और उनके दादा के बीच घनिष्ठ संबंध को जीवंत करने के लिए सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक में उल्लेखित शाही पत्राचार और अभिलेख महाराजा के बारे में आगे पढऩे में किसी की भी रुचि बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक ने कपूरथला परिवार के पूरे विस्तार पर खूबसूरती से प्रकाश डाला है। इस अवसर पर राज्यपाल बदनौर ने कहा कि उन्हें दो शाही परिवारों के सदस्यों के बीच खड़े होकर गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इस पुस्तक को किसी कॉफी टेबल बुक से कहीं अधिक बताया और कहा कि व्यापक शोध को इस पुस्तक में शामिल किया गया है, जो पहले और दूसरे औद्योगिक क्रांतियों के बीच की अवधि की पृष्ठभूमि से संबंधित है और जिस दौरान कई उल्लेखनीय घटनाएं और घटनाक्रम दुनिया भर में हुए थे ।भारत में यह वह दौर था जिसमें राजस्थान में गंगा सिंह के साथ-साथ पंजाब में भूपिंदर सिंह और जगजीत सिंह जैसे कुछ सबसे प्रसिद्ध शासक हुए। इन सभी राजघरानों ने अपने राज्यों के लिए बहुत अच्छा काम किया। उन्होंने कहा कि हालांकि राजस्थान के शाही परिवारों ने अपने महलों को होटलों में बदल दिया लेकिन पंजाब में शाही परिवारों ने लोगों के कल्याण के लिए सब कुछ छोड़ दिया। राज्यपाल ने कपूरथला पैलेस में चलाए जा रहे स्कूल और पटियाला के मोती बाग में स्पोट्र्स इंस्टीट्यूट का उदाहरण दिया।इस मौके पर बोलते हुए सिंथेया मीरा फ्रेडरिक ने कहा कि फ्रेंच आर्किटेक्चर के प्रति महाराजा के प्यार ने उनको हैरान कर दिया। इस किताब को रलीज़ करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह किताब औपचारिक तौर पर चण्डीगढ़ में रलीज की जा रही है। उन्होंने कहा कि महाराजा जगतजीत सिंह आर्किटेक्चर और शहरी योजनाबंदी के प्रति बहुत भावुक थे। उन्होंने आधुनिकता को अच्छी तरह अपनाया और वह एक बहुत ही प्रगतिशील आकर्षण वाले शासक थे। ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह ने किताब लिखने में आईं चुनौतियों का जि़क्र किया।पुस्तक लिखने में आई चुनौतियों के बारे में बात करते हुए ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह ने कहा कि किताब में आम तौर पर सामंती ठाकुरों और नवाबों के रूप में वर्गीकृत किए राजाओं के बारे में लंबी-चौड़ी धारणाएं हैं, जो समाज की हर चीज का कारण थे। ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह ने कहा कि ऐसे समाज के लिए जो अब धन के दिखावटी प्रदर्शन पर विश्वास करता है, वहां एक महाराजा जो मूल रूप से समानता के लिए खड़ा हुआ, पर लिखी पुस्तक विचारों को सही दिशा प्रदान करेगी। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा, मनप्रीत सिंह बादल और राणा गुरमीत सिंह सोढी, मुख्यमंत्री के सीनियर सलाहकार लैफ्टिनैंट जनरल टी.एस. शेरगिल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, विशेष सचिव मुख्यमंत्री गुरकीरत किरपाल सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विन्नी महाजन, डी.जी.पी. सुरेश अरोड़ा, डीजीपी इंटेलिजेंस दिनकर गुप्ता, वित्त सचिव अनिरुद्ध तिवाड़ी, सेना के पूर्व प्रमुख वी.पी. मलिक और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बांसल उपस्थित थे।