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मुख्यमंत्रियों का चयन बना कांग्रेस का सिरदर्द, दिन भर चला बैठकों का दौर

पांच राज्यों में से छत्तीसगढ में कांग्रेस को स्पष्ठ बहुमत मिला जहां अभी तक मुख्यमंत्री की घोषणा नही हुई है…तो वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश में बहुमत से दूर काग्रेस ने सराकर बनाने का दावा तो कर दिया लेकिन मुख्यमंत्री के नाम की दुविधा के समाधान के लिए कार्यकर्ता, प्रियंका वाडरा और खुद काग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का लंबा मंथन चल रहा है।

दो दिन की भारी जद्दोजहद के बाद भी कांग्रेस आलाकमान अपने नए मुख्यमंत्रियों के नामों का एलान नहीं कर सका है। दिन भर चली बैठकों के दौर के बाद देर शाम इन नामों का एलान होना था लेकिन अब भी तीनों राज्यों की जनता अपने नए मुख्य़मंत्री के नाम की बाट जोह रही है।

सबसे पहले बात राजस्थान की करें तो  दिन भर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच किसी एक नाम के चयन के लिए माथापच्ची होती रही ।  राहुल गांधी ने सबसे पहले राजस्थान के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस के राज्य प्रभारी अविनाश पांडे के साथ बैठक की। इसके के बाद राहुल ने अपने आवास पर गहलोत और पायलट से मुलाकात की। इन बैठकों के बीच राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी विधायकों और कार्यकर्ताओं की राय ले रही है तथा नामों की जल्द ही घोषणा की जाएगी।
इन सबके बीच राजस्थान में गहलोत और सचिन पायलट समर्थकों के बीच जोरआजमाइश होती रही। राजस्थान के कई जिलों में सचिन पायलट के समर्थकों ने हंगामा किया और सडकें जाम कर दी।

करौली जिले में दो अलग अलग सडक मार्गों पर पायलट समर्थकों  ने जाम लगाकर प्रदर्शन किया  जाम लगाने के कारण दोनों ओर सडक पर वाहनों की कतार लग गई। वहीं रोडवेज ने बसों का संचालन भी रोक दिया है। पायलट को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे गुर्जर समाज के लोगों ने बताया कि सचिन पायलट ने प्रदेश में पांच साल मेहनत की है तथा कांग्रेस पार्टी को जीत दिलाकर सत्ता में वापसी कराई है ऐसे में मुख्यमंत्री का पद उन्हे मिलना चाहिए। उन्होने कहा कि यदि सचिन पायलट को सीएम नहीं बनाया तो प्रदेशभर में सडक जाम कर प्रदर्शन किया जायेगा।

कांग्रेस की नयी सरकार अभी बनी नहीं है लेकिन इन सरकारों के सामने चुनौतियां मुंह बाए खडी हैं। कांग्रेस के सामने सरकार बनाने के बाद 10 दिनों में चुनावी वादों को पूरा करने की चुनौती है. ये वादा किसी और ने नहीं बल्कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किया है । राहुल ने अपनी रैलियों में जगह-जगह ऐलान किया था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर दस दिनों में किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा वर्ना ग्यारहवें दिन सीएम बदल दिया जाएगा. अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने चुनावी वादे को पूरा करने की है  ।

ऐसे ही बाकी राज्यों में भी कांग्रेस ने लोगों से तमाम वादे किए हैं । अब नयी सरकारों पर इन वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी होगी।

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