पंजाब

पंजाब सरकार द्वारा पराली को जलाने से रोकने के लिए समूह विभागों के कर्मचारियों की जवाबदेही तय

हिदायतों की पालना न करने वालों के खि़लाफ़ अनुशासनी कार्यवाही होगी
चंडीगढ़ – पराली जलाने विरोधी मुहिम में सरकारी कर्मचारियों की अधिक से अधिक भागीदारी जुटातेे हुए पंजाब सरकार ने सभी विभागों /बोर्डों /निगमों और सहकारी सभाओं के समूचे स्टाफ के लिए विस्तृत हिदायतें जारी की हैं। इन हिदायतों के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों के अपने खेतों के साथ-साथ उनके द्वारा जोते जाते खेतों में भी पराली जलाने की घटना घटने पर जवाबदेही तय की जायेगी। पराली जलाने विरोधी मुहिम के प्रांतीय नोडल अफ़सर के.एस. पन्नू ने बताया कि पंजाब सरकार ने सभी विभागों को हिदायतें जारी करके यह भी यकीनी बनाने के लिए कहा कि उनके कर्मचारी पराली को आग लगाने वाली घटनाओं में शामिल न हों। इन कर्मचारियों को पराली जलाने के साथ पर्यावरण और मानवीय सेहत पर पड़ते दुष्प्रभाव संबंधी किसानों को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि इन हिदायतों की पालना न करने वाले कर्मचारियों के खि़लाफ़ सेवा-नियमों के अनुसार सख्त अनुशासनी कार्यवाही की जायेगी। इन कर्मचारियों को राज्यभर में फ़सल के अवशेष को जलाए जाने की हर घटना को संबंधित अथॉरटी के ध्यान में लाने की हिदायत की गई है। जि़क्रयोग्य है कि राज्य सरकार ने पराली के उचित प्रबंधन के लिए व्यापक प्रोग्राम बनाया है जिससे किसान इसको जलाए बिना इसका प्रबंधन कर सकें। किसानों को इस मकसद के लिए सब्सिडी वाली 24315 कृषि मशीनों /यंत्र सप्लाई किये जा रहे हैं। किसानों के अलावा यह साजो-समान सहकारी सभाओंं और कस्टम हायर सैंटरों को भी दिया जा रहा है जिससे पराली बिल्कुल भी न जलाए जाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। किसानों को पराली जलाने के विरुद्ध जागरूक करने के लिए गाँव स्तर पर 8000 नोडल अफ़सर तैनात किये हैं। पंजाब में 65 लाख एकड़ क्षेत्रफल में धान की फ़सल बोई गयी है। धान की कटाई के बाद तकरीबन 20 मिलियन टन पराली खेतों में पड़ी रहती है जिसका किसानों द्वारा आगामी रवी की फ़सल की बिजवाई से पहले प्रबंधन करना होता है। एक अन्दाजे के मुताबिक खेतों में से पराली को हटाने के लिए तकरीबन 15 मिलियन टन पराली जला दी जाती है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर पराली न जलाने वाले किसानों को 100 रूपये प्रति क्विंटल मुआवज़े के तौर पर दिए जाने की माँग की थी जिससे पराली जलाने से रोकने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

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