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एनआरसी के मसले पर सियासत, बीजेपी ने बोला कांग्रेस पर हमला

सोमवार को असम में एनआरसी जारी होने  के बाद सियासी संग्राम चरम पर है। संसद में तो ये मामला उठा ही संसद के बाहर भी सियासी घमासान जारी रहा। कांग्रेस समेत कुछ दल जहां बीजेपी पर इस मामले में हमला कर रहे हैं तो बीजेपी की ओर से करारा पलटवार किया गया है। असम में वैध और अवैध नागरिकों की पहचान के लिए चल रही राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया को लेकर सियासत भी शुरु हो गई है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस संवेदनशील मसले पर सियायत करे के लिए विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।  उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा एनआरसी को अपडेट करने का काम निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया गया है। पूरी प्रक्रिया में किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा और सबको हर स्तर पर सुनवाई का पूरी अवसर दिया जाएगा। सोमवार को असम में एनआरसी जारी होने  के बाद सियासी संग्राम चरम पर है । संसद में तो ये मामला उठा ही संसद के बाहर भी सियासी घमासान जारी रहा । कांग्रेस समेत कुछ दल जहां बीजेपी पर इस मामले में हमला कर रहे हैं तो बीजेपी की ओर से करारा पलटवार किया गया है।  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह  ने प्रेस कांफ्रेंस करके पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ही असम के लोगों के मानवाधिकार का मसला भी है। उन्होंने कहा कि घुसपैठ के जरिए देश की सुरक्षा को  तार तार करने की कोशिश की जा रही है । इस मसले पर सियासत करने वाले दलों पर बरसते हुए  उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के मसले को वोट बैंक से उपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि एनआरसी जो नाम हटे हैं वो घुसपैठियें हैं। साथ ही उन्होंने ये भी साफ किया कि किसी भी भारतीय नागरिक का नाम नहीं कटेगा और किसी को डरने की जरुरत नहीं है । अमित शाह ने कहा कि पूर्व पीएम इंदिरा ने कहा था कि किसी घुसपैठियों को देश में नहीं आने देंगे लेकिन आज राहुल गांधी इस लाइन से अलग रुख अपना रहे हैं। इस बीच कांग्रेस ने कहा है कि  देश के कई हिस्सों के लोग अलग अलग प्रांतों में रहते हैं। इसलिए इसकी सही जांच होनी चाहिए ताकि कोई भारतीय नागरिक अपने अधिकार से वंचित नहीं रह जाए।

इसी मसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने दिलली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करके अपनी सरकार का पक्ष रखा। उधर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है  कि असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के मसौदे के प्रकाशन के आधार पर किसी के भी खिलाफ कोई दण्डात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि यह अभी सिर्फ एक मसौदा ही है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन की पीठ ने केन्द्र को निर्देश दिया कि इस मसौदे के संदर्भ में दावों और आपत्तियों के निरस्तारण के लिये मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाये। यह मानक संचालन प्रक्रिया 16 तक उसके समक्ष मंजूरी के लिये पेश की जाये। इससे पहले, असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के समन्यवक प्रतीक हजेला ने न्यायालय के समक्ष अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की जिसमें एनआरसी के  प्रकाशन के बारे में विस्तृत विवरण था। केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के निपटारे में संबंधित मंत्रालय मानक संचालन प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करने के लिये तैयार है। उधर  असम में एनआरसी के मसौदे के जारी होने के बाद मंगलवार को ज्यादातर लोगों ने एनआरसी केंद्रों पर उमड़ने की बजाय ऑनलाइन सूची में अपना – अपना नाम देखने का विकल्प चुना। लोगों ने एसएमएस सेवा या एनआरसी की वेबसाइट पर सूची में अपने नाम ढूंढे। हालांकि असम सरकार ने काफी बंदोबस्त किए हैं।

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