नई दिल्ली। सरकार ने इस साल अप्रैल से नवंबर के बीच 12,000 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी केे मामलों का पता लगाया है। बुधवार को एक वरिष्ठ कर अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य जॉन जोसेफ ने कहा कि ई-वे बिल के बावजूद जीएसटी चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। इसे रोकने के उपाय करने होंगे।एसोचैम के कार्यक्रम में जोसेफ ने कहा कि हमने अप्रैल के बाद से चोरी पकड़ने पर ध्यान दिया और अप्रैल-नवंबर तक 12,000 करोड़ रुपये जीएसटी चोरी के मामलों का पता लगाया है। जोसेफ का कहना है कि 8 महीने में जितनी जीएसटी चोरी पकड़ी गई वह सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स चोरी के मामलों से काफी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि टैक्स अधिकारियों ने करीब 8,000 करोड़ रुपए की रिकवरी कर ली है। सामान और सेवा कर (जीएसटी) को 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था।जोसेफ ने कहा कि 1.2 करोड़ जीएसटी करदाताओं में से सिर्फ 5-10% लोग टैक्स चोरी कर रहे हैं। ऐसे लोगों की वजह से इंडस्ट्री का नाम खराब हो रहा है। जोसेफ ने कहा कि सरकार बदलने से जीएसटी खत्म नहीं होगा। इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी रिटर्न फॉर्म शुरुआत में बीटा वर्जन में लाए जाएंगे। नए फॉर्म अप्रैल 2019 में लॉन्च किए जाएंगे।बता दें कि जीएसटी रिटर्न फाइल करने के लिए नया फॉर्म अगले साल एक अप्रैल से उपलब्ध होगा। सरकार को चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में जीएसटी से 7.76 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में 13.48 लाख करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह का लक्ष्य तय किया गया है।