40 साल से अधिक आयु की महिलाओं में आस्टीओपोरोसीस (हडिडय़ों का कमजोर होना) एक सामान्य बीमारी बन चुकी है। जिसका मूल कारण कैल्शियम की कमी है। यह बात गुरुवार को कंवर मल्टी स्पैशलिटी अस्पताल में नि:शुल्क बोन मिनरल डेनिस्टी टेस्ट में जांच करवाने आए रोगियों को संबोधित करते हुए अस्पताल के एमडी डा. जगदीश्वर सिंह कंवर ने कही। उन्होंने कहा कि आस्टीओपोरोसीस ऐसा रोग है, जो हडिडयों को उस हद तक पतला कर देता है, जिससे वे आसानी से टूट सकती है। इसे साइलंट रोग भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें आप हडिडयों का कमजोर होना अनुभव नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वृद्ध महिलाओं में इसकी संभावना अधिक रहती है। यह एक दीर्घ कालीन स्थिति है, जिसे जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तनों द्वारा जोड़ों को क्षति से बचाकर सक्रियता व विश्राम में संतुलन रखकर ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कैल्शियम की कमी इसका मूल कारण रहता है। बीएमडी टेस्ट से हडिडयों की गुणवत्ता को जांच व परखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि 11 से 24 वर्ष के युवाओं को 1200 से 1500 एमजी कैल्शियम युक्त डाईट रोजाना चाहिए, जबकि 25 से 64 वर्ष आयु के बीच महिला व पुरुषों को रोजाना अपनी डाईट में एक हजार एमजी तक सेवन करना चाहिए। वहीं, 65 वर्ष से अधिक सभी बुजुर्गो को 1500 एमजी तक कैल्शियम युक्त डाईट लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नॉनवेज व वैज दोनों प्रकार के फूड आईटम में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है। जिसका सही इस्तेमाल करना चाहिए। शिविर के दौरान मियर विटावायोटिक कंपनी के प्रतिनिधि लखविंद्र सिंह व सुरेंद्र कुमार ने 65 रोगियों के बीएमडी टेस्ट निशुल्क किए। इस अवसर पर डा. किरण कंवर, डा. नवनीत कुमार व अन्य उपस्थित रहे।