असम में एनआरसी के मुद्दे पर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. जहां ये मामला संसद में गरमाया हुआ है, तो सड़कों पर भी प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। हालांकि छूटे हुए लोगों के पास अभी भी अपना नाम दर्ज कराने का मौका है, जिसके लिए उन्हें वैध कागजात दिखाने होंगे।असम में एनआरसी का सियासी मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक गरमाया हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के खिलाफ कोलकाता में गुरुवार को भाजपा ने प्रदर्शन किया। भाजपा ममता बनर्जी के उस बयान पर बेहत सख्त है, जिसमें उन्होंने एनआरसी की वजह से देश में गृहयुद्ध होने की बात कही थी। वहीं कांग्रेस ने भी कोलकाता में एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. ममता बनर्जी के लिए इस मुद्दे पर असहज स्थिति तब पैदा हो गई जब उनकी ही पार्टी के असम राज्य के अध्यक्ष दिपेन पाठक ने इस्तीफा दे दिया। इस विषय पर उन्होंने कहा कि सरकार एनआरसी में नाम शामिल करने के लिए सबको मौका दे रही है। ऐसे में किसी भी तरह का प्रदर्शन करके राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
एनआरसी का मुद्दा संसद में भी गरमा रहा, जिसकी वजह से संसद की कार्यवाही भी बाधित रही। इस बीच भाजपा ने ममता बनर्जी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए अवैध घुसपैठियों की जांच पूरे देश में कराने की मांग की है।एनआरसी के काम कांग्रेस सरकार के समय पहले लगभग 37 साल पहले शुरू हुआ था लेकिन हालिया विरोध में कांग्रेस भी शामिल है। इस बीच असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने आश्वासन दिया कि प्रत्येक भारतीय का नाम अंतिम एनआरसी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। एनआरसी के 2 ड्राफ्ट आने के बाद भी जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उनके पास अभी भी मौका होगा कि वो अपना नाम वैध दस्तावेज के आधार पर शामिल करा सकें। इस प्रकिया को लेकर अभी भी स्थानीय लोग आशान्वित हैं कि उनका नाम दर्ज हो जाएगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनआरसी का काम चल रहा है, जिसमें करीब 40 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं है लेकिन जिन लोगों का नाम छूट गया है उनको अभी भी मौका मिल रहा है उसके बाद भी असम, पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक कई सियासी दल राजनीति को गरमाए हुए हैं, जिसे जानकार वोट बैंक की कसरत करार दे रहे हैं।