पंजाब

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर मुख्यमंत्री द्वारा 24 घंटे नजऱ रखे जाने के बाद प्रभावित गाँवों में हालात सामान्य बनने लगे

विभिन्न विभागों के करीब 25 हज़ार कामगार ज़मीनी स्तर पर कर रहे हैं राहत, पुनर्वास और मुरम्मत का काम

चंडीगढ़ – पंजाब में बारिश के बाद बाढ़ जैसी कुदरती प्रकोप का शिकार हुए क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली का काम तकरीबन मुकम्मल हो गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बाढ़ के हालात पैदा होने के बाद समूह विभागों को ख़ास हिदायतें दी और तत्काल तौर पर राहत कार्य शुरू कर दिए गए। मुख्यमंत्री द्वारा 24 घंटे राहत कार्यों पर नजऱ रखी जा रही है। यह जानकारी पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने दी।प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने विभागों के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और राहत कार्यों को पूरा करने के लिए समय -सीमा निश्चित की थी और मुख्यमंत्री निजी स्तर पर इन समूह राहत कार्यों पर नजऱ रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में बिजली स्पलाई पूरी तरह से बहाल कर दी गई है जबकि टूटी हुई सडक़ों की मुरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसके साथ ही ज़मीनी स्तर पर जाकर बाढ़ के कारण हुए कुल नुक्सान का जायज़ा लगाया जा रहा है और साथ ही निवासियों को संभावी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें दिन -रात काम कर रही हैं और टीकाकरण मुहिम भी शुरू की गई है।उन्होंने बताया कि अलग-अलग विभागों के 25 हज़ार के करीब कामगार राहत कार्यों को पूरा कर रहे हैं। नदियों में अलग -अलग स्थानों पर पड़ी दरारों को मुकम्मल तौर पर भर दिया गया है। हज़ारों के करीब कामगार प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी के कीटाणूयों को मारने के लिए फौगिंग कर रहे हैं। पीने वाले पानी के सैंपल लिए गए हैं और पानी में क्लोरीन मिलाकर कीटाणू मुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि मलेरिया और डेंगू के फैलाव को रोकने के लिए टैस्ट किये जा रहे हैं और सैनीटरी नैपकिन और मच्छरदानियाँ भी मुहैया करवाई जा रही हैं।प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ के कारण जान और माल को हुए शुरूआती नुकसान का पता लगाया जा चुका है। प्रभावित किसानों को बीजों का मुफ्त वितरण शुरू हो गया है और विभिन्न शीर्षों के तहत मुआवजा वितरण भी जारी है। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुसार फसलों को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए गिरदावरी जारी है और इसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।जब तक कि जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से पानी की सप्लाई पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग ने गांवों में स्वच्छ और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी के टैंकरों को काम में लगाया है। किसी भी महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए सभी गांवों में जल जांच दल पानी की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं।इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को पानी, सूखे राशन की किट, चीनी, चावल, गेहूं का आटा, घी, दूध पाउडर मुहैया कराए जा रहे हैं। भारतीय सेना के 7 हेलीकॉप्टरों और भारतीय वायुसेना के दो एमआई -17 हेलिकॉप्टरों को भोजन के पैकेट/परांठे के एयरड्रॉप के काम के लिए लगाया गया है। जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि जालंधर के सभी 21 और सुल्तानपुर लोधी के 87 बाढ़ प्रभावित गावों की बिजली फिर से बहाल कर करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों ने किश्तीयों के सहारे सभी मुसीबतों से लड़ते हुए और करंट लगने के किसी भी डर की परवाह न करते हुए ट्रांसफर वाले खंबों को सीधा किया। मेहराजवाला 66केवी बिजली सबस्टेशन जोकि पानी में पूरी तरह डूब चुका था, को रिकॉर्ड समय में फिर से चालू कर दिया गया है।तटबंधों, सडक़ों, पुलों, पुलियों और अन्य बुनियादी ढांचे सहित क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है और जालंधर, फिरोजपुर और लुधियाना में लगभग सभी दरारों को भर लिया गया है। राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की छह टीमों, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की तीन टीमों और भारतीय सेना की छह टुकड़ीयों को बचाव कार्यों के लिए लगाा गया है और विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की मदद से सतलुज नदी में 18 दरारों को भरा गया है।युद्ध स्तर पर जारी पंपिंग ऑपरेशन से बाढग़्रस्त गांवों में से पानी बाहर निकाला जा रहा है, जबकि सुल्तानपुर लोधी उप-मंडल में शुरूआती बाढ़ के कारण कटे हुए 20 गांवों में से 14 गावों का संपर्क बहाल कर दिया गया है। मंड इंदरपुर, मंड अंद्रीसा, शाहवाला अंद्रीसा, कुतुबवाल, शाहवाला नक्क़ी और रामगढ़ दलेली नामक छह गाँवों का संपर्क अभी भी कटा हुआ है क्योंकि पंजाब मंडी बोर्ड की गाँव देरावाल (जालंधर)-मंड इंदरपुर -गाँव मानू (फिऱोज़पुर) सडक़ पर तीन स्थानों (एक 900 फुट लंबी और दो 200 फुट लंबी) पर दरारें पड़ी हुई हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब मंडी बोर्ड को युद्धस्तर पर सडक़ संपर्क बहाल करने के लिए निर्देश दिए हैं। पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के कर्मचारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलों, सडक़ों और सरकारी भवनों को हुए नुकसान का पता लगाने हेतु विस्तृत सर्वेक्षण कर रहे हैं।मुख्यमंत्री द्वारा प्रभावित लोगों को प्रदान की जा रही चिकित्सा सुविधाओं पर भी नज़र रखी जा रही है जिसमें लोगों को राहत शिविरों, चिकित्सा शिविरों और यहां तक कि उनके घरों तक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हंै। मोबाइल चिकित्सा इकाइयां गुणवत्तक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक गांव से दूसरे गांव तक जा रही हैं। ओपीडी में 21,208 लोगों का इलाज किया गया है। विशेष एंटी लारवा टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में डेंगू के लारवा का पता लगाने के लिए काम कर रही हैं। लोगों को मलेरिया, डेंगू, डायरिया, टाइफाइड और त्वचा की समस्याओं जैसे रोगों से बचाव के उपायों के बारे में सिखाने के लिए विशेष दल गांवों का दौरा कर रहे हैं, क्योंकि इन बीमारियों से निपटने के लिए सामुदायिक सहभागिता आवश्यक है।इसी तरह बाढ़ से प्रभावित मवेशियों के उपचार और टीकाकरण के साथ-साथ उनके पालन और आहार/चारे की व्यवस्था के लिए बहुत बड़ी संख्या में पशु चिकित्सक टीमों को भी काम पे लगाया गया है।बाढ़ के कारण गांवों में बीमारियों के फैलने के खतरे को ध्यान में रखते हुए गांवों में एक बड़ा स्वच्छता अभियान शुरू किया गया है। जल जनित रोगों के प्रसार की रोकथाम के लिए फॉगिंग टीमों को तैनात किया गया है। इसी तरह मनरेगा कामगारों सहित सफाई कामगारों को बेहद पेशेवर तरीके से गांवों की सफाई का काम सौंपा गया है। नालियों में से दुर्गंध को दूर करने और संबंधित बीमारियों के प्रकोप को रोकने के लिए इनमें ब्लीचिंग पाउडर का छिडक़ाव किया जा रहा है।

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