पंजाब

नेपाल में नये बने राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब विधानसभा की कार्यविधी समझी

स्पीकर राणा के.पी. सिंह ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं से करवाया अवगत
चंडीगढ़ – नेपाल के एक 15 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल द्वारा पंजाब विधानसभा का दौरा किया गया। यह प्रतिनिधिमंडल नेपाल में बनाऐ गए नये 7 राज्यों में से एक राज्य का प्रतिनिधित्व करता है जो कि राज्य नंबर 5 के तौर पर जाना जाता है। इस प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख दीपेंद्र कुमार पन मगर ने बताया कि नेपाल में नए संविधान के अस्तित्व में आने के बाद देश में 7 नये राज्य बनाऐ गए हैं। इन राज्यों के अभी नाम रखे जाने हैं और स्थायी राजधानियाँ भी बनाईं जानी हैं। फिलहाल राज्य नंबर 5 की अस्थाई राजधानी बुटवाल बनाई गई है। प्रांतीय विधान सभा की कार्यविधी समझने के लिए राज्य नंबर 5 के इस प्रतिनिधिमंडल द्वारा पंजाब विधान सभा का दौरा किया गया। इस मौके पर पंजाब विधान सभा के स्पीकर राणा के.पी. सिंह ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उनको भारतीय संविधान के बारे में संक्षिप्त में अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और भारतीय संविधान दुनिया के किसी भी देश के लिखित संविधान से सबसे लंबा संविधान है। उन्होंने बताया कि भारत के संविधान में अलग -अलग देशों के संविधानों की विशेषताओं को शामिल किया गया है इसलिए यह एक विलक्षण दस्तावेज़ है और भारत में कानून से ऊपर कोई नहीं। उन्होंने नेपाल के राज्य नंबर 5 के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को पंजाब विधान सभा की नियमावली प्रदान की और विधान सभा की कार्यविधी से भी अवगत करवाया।
इस प्रतिनिधिमंडल में 11 विधायक और 4 अधिकारी शामिल थे। नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब विधान सभा के स्पीकर राणा के.पी. सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि नेपाल का संविधान अभी मूलभूत रूप में है और भारत के पास 70 सालों का तजुर्बा है। उन्होंने अपने इस दौरे को काफ़ी लाभप्रद बताया और कहा कि राज्यों की कार्यप्रणाली बारे उनको अहम जानकारी प्राप्त हुई है। इस मौके पर दूसरों के अलावा विधायक हरप्रताप सिंह अजनाला, पंजाब विधान सभा की सचिव शशि लखनपाल मिश्रा, स्पीकर के सचिव राम लोक और नेपाली प्रतिनिधिमंडल में दीपेंद्र कुमार पन मगर के अलावा साहसराम यादव, निर्मला शेतरी, कल्पना पांडे, तारा जी.सी., तुलसी प्रसाद चौधरी, तेज़ बहादुर वोली, नारायण प्रसाद आचार्य, बाबूराम गौतम, बीर बहादुर राणा, बिशनूं प्रसाद पंथी, बैजनाथ कालावर (सभी विधायक), नेपाली विधानसभा के सचिव दुर्लभ कुमार पन मगर, श्याम प्रसाद श्रेष्ठ, दिनेश अधिकारी और अलोक अगरहरी शामिल थे।

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