किसानों को पर्यावरण की संभाल के लिए गुरू नानक देव जी द्वारा दिया संदेश अपनाने का न्योता
चंडीगढ़ – किसानों को पराली जलाने के रुझान को त्यागने की अपील करते हुये पंजाब सरकार ने उनको श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के पवित्र अवसर पर सम्मान स्वरूप गुरू साहिब द्वारा मूल्यवान प्राकृतिक संसाधनों के सरंक्षण संबंधी दिए संदेश को अपनाने का न्योता दिया है। धान की पराली जलाने के साथ मिट्टी, प्राकृतिक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ते दुष्प्रभावों के मद्देनजऱ गुरू साहिब जी के चरण स्पर्श प्राप्त नगर सुल्तानपुर लोधी में पिछले सप्ताह मंत्रीमंडल की हुई मीटिंग के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह और कैबिनेट मंत्रियों ने भी किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के सरंक्षण संबंधी श्री गुरु नानक देव जी के फलसफे को अपना कर पराली जलाने के रुझान को ख़त्म करने की अपील की।पराली जलाने के बुरे नतीजों का जि़क्र करते हुये कृषि सचिव काहन सिंह पन्नू ने बताया कि पराली को आग लाने से प्रति हेक्टेयर 30 किलो नाईट्रोजन, 13.8 किलो फास्फोरस, 30 किलो पोटाश, 6.48 किलो सल्फर और 2400 किलो कार्बन जल कर तबाह हो जाने और मित्र कीड़ों के मारे जाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। इसी दौरान श्री पन्नू ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कॉन्फ्ऱेंस के मौके पर भारत सरकार द्वारा फ़सल के अवशेष के उचित ढंग के साथ निपटारा करने के लिए सम्मानित किये पंजाब के प्रगतिशील किसानों की भरपूर सराहना करते हुये अन्य सभी किसानों भी निवेकली पहुँच रखने वाले इन किसानों के पदचिन्हों पर चलने का न्योता दिया जिससे पंजाब को ‘पराली जलाने की समस्या से मुक्त राज्य’ बनाया जा सके।श्री पन्नू ने पराली जलाने के रुझान को ख़त्म करने संबंधी किसानों को उत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाये जा रहे विभिन्न कदमों की जानकारी देते हुये बताया कि मौजूदा वित्तीय साल के दौरान किसानों को 274 करोड़ रुपए की सब्सिडी पर फसलों के अवशेष के निपटारे के लिए लगभग 28000 मशीनें /कृषि यंत्र मुहैया करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के अंतर्गत किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा पिछले साल भी किसानों को 269 करोड़ की सब्सिडी के साथ ऐसी 28000 मशीनें मुहैया करवाई गई थीं। उन्होंने कहा कि किसानों के सहयोग और सरकार के ठोस यत्नों के साकारत्मक नतीजे सामने आए हैं जिसका प्रमाण बड़ी संख्या में किसानों द्वारा पराली जलाने के रिवायती चक्कर में से निकल कर फसलों के अवशेष का खेतों में ही निपटारा करने के रास्ते को अपनाने से मिलता है।