पंजाब

रैड्डी ने शिकायत निवारण प्रणाली को बनाया सरल

45 दिनों के अंदर शिकायतों का फ़ैसला करना अनिवार्य

चंडीगढ़ – शिकायत निवारण प्रक्रिया को आसान बनाने के मद्देनजऱ, श्री डी.पी.रैड्डी, चेयरमैन पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने समूह अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (विकास)-कम-जि़ला शिकायत निवारण अधिकारियों (डी.जी.आर.ओज.) को हिदायत की कि वह राष्ट्रीय खाद्यसुरक्षा एक्ट के अंतर्गत अनाज के वितरण सम्बन्धी मामलों में शिकायतकर्ताओं की शिकायतों के जल्दी और प्रभावशाली निपटारे को यकीनी बनाएं।डी.जी.आर.ओज. के साथ वीडियो कॉन्फ्ऱेंस करते हुए पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन ने उनको अपने दफ्तरों, राशन डिपूओं, स्कूलों, आंगणवाड़ी केन्द्रों, एस.डी.एम. दफ्तरों, तहसीलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शिकायत बॉक्स लगाने के निर्देश दिए। उनहोंने यह भी कहा कि शिकायतों को दूर करने के लिए तीन दिनों में कम से कम एक बार बॉक्स ज़रूर खोले जाएँ जिससे शिकायतों के निपटारों के लिए तुरंत कार्यवाही की जा सके। उन्होंने कहा कि डी.जी.आर.ओज को जि़ला प्रशासन की वेबसाइटों के अलावा अपने दफ्तरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अपना दफ़्तरी पता, टैलिफ़ोन नंबर, ई -मेल और फैक्स नंबर दिखाना ज़रूरी है।शिकायतों के निष्पक्ष और जल्दी निपटारे के लिए, श्री रैड्डी ने प्रभावशाली सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि हरेक शिकायत के लिए अलग फाइल पर विशेष नंबर लगाकर उसका निर्णय किया जाये और शिकायतकर्ता को शिकायत प्राप्त होने के एक दिन में लिखित रसीद या इलैक्ट्रॉनिक माध्यम के द्वारा तारीख और शिकायत नंबर समेत सूचित किया जाये।पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन ने कहा कि इसके बाद डी.जी.आर.ओज. की तरफ से शिकायतकर्ता और सम्बन्धित अधिकारियों को सुनवाई की निर्धारित तारीख़ संबंधी नोटिस जारी करने चाहिएं। निर्धारित तारीख़ को बयान और सबूत दर्ज करके अंतरिम आदेश (जिमनी आदेश) जारी करने चाहिएं। उन्होंने बताया कि शिकायतें मिलने के बाद 45 दिनों के अंदर-अंदर शिकायतों का फ़ैसला करना लाजि़मी है। अगर शिकायत के फ़ैसले में कोई देरी होती है तो देरी का कारण बताते हुए शिकायतकर्ता को एक अंतरिम जवाब भेजना ज़रूरी है। जिन शिकायतों के फ़ैसले में देरी होती है, उन सभी मामलों सम्बन्धी पंजाब राज्य खाद्य आयोग को जानकारी हेतु इसकी एक कॉपी भी भेजी जाये।श्री रेड्डी ने कहा कि शिकायतकर्ता के पेश न होने की सूरत में डी.जी.आर.ओ. आदेश पास करके शिकायत को ख़ारिज कर सकता है। अगर दूसरा पक्ष गैरहाजिऱ होता है, तो डी.जी.आर.ओ. इस मामले की अपने स्तर पर जांच कर सकता है और शिकायत का फ़ैसला कर सकता है। जारी किये गए हुक्म की एक कॉपी शिकायतकर्ता और जानकारी हेतु पंजाब राज्य खाद्य आयोग को दी जायेगी। उन्होंने फ़ैसले और शिकायतों के निपटारे में देरी होने सम्बन्धी हर महीने की 7 तारीख तक पंजाब राज्य खाद्य आयोग को रिपोर्ट पेश करने की हिदायत की।अंत में पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन ने कहा कि एक बेहतर शिकायत निवारण विधि विकसित करना सभी के लिए लाभदायक है। बढिय़ा शिकायत निवारण प्रणाली के साथ लोगों का सिस्टम के प्रति विश्वास बढ़ेगा और इससे लोग महसूस करेंगे कि सरकार उनके प्रति हमदर्दी रखती है और दूसरी तरफ़, यह सरकार का छवि सुधारती है और विभिन्न नीतियों और प्रोग्रामों को निर्विघ्न लागू करने का रास्ता साफ करती है।इस मौके पर वीडियो कॉन्फ्ऱेंस के दौरान श्री ए.के. शर्मा, मिस जसविन्दर कुमार, श्रीमती किरनप्रीत कौर, श्री जी.एस. गरेवाल और श्री अमनदीप बांसल (सभी पंजाब राज्य खाद्य आयोग के मैंबर) शामिल थे।

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