भारत

बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण पर ज़ोर

नरेंद्र मोदी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. बजट में महिलाओं और युवाओं का भी खास ख्याल रखा गया है. इससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया गया है कि बचत खाता रखने और उसका इस्तेमाल करने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या बढ़कर 53% हो गई है.

भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री से इस बजट में महिलाओं को अपने लिए काफी उम्मीद थीं और जैसे ही सदन में बजट पेश करने से पहले उन्होंने महिलाओं के लिए ये शब्द कहे तो जैसे वो उम्मीद भी पूरी होती नजर आई. देश की आधी आबादी के लिए योजनाओं की घोषणा करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि उनकी सरकार हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इस बजट में महिलाओं के लिए कुछ योजनाओं पर नजर डालें तो,

सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करके एक ऐसी समिति बनाई जाएगी जो औरतों की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए सुझाव देगी.

मुद्रा स्कीम के तहत स्वयंसेवी समूह की एक सदस्य को एक लाख रुपये तक के कर्ज़ का एलान किया गया है.

महिलाओं के स्वयंसेवी समूहों को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में उनके लिए फंड की घोषणा की गई है. जिसके तहत जनधन खाताधारक सदस्य महिला को 5 हजार रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलेगी.

अनुसूचित जाति-जनजाति महिलाओं की कारोबार में मदद के लिए 15वें वित्तीय आयोग के तहत अलग योजना का भी जिक्र है.

संसद में इस बार सबसे अधिक 78 महिलाएं चुनकर आई हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. लिहाजा सरकार का फोकस अधिक दिखाई भी देता है. वित्त मंत्री ने सरकार की आयुष्मान योजना का भी उल्लेख किया और महिलाओं की सेहत के बारे में बात की. सौभाग्य योजना के तहत घरों में बिजली देने और उज्ज्वला योजना के जरिए रसोईघर को धुंए से आजादी दिलाने समेत 7 करोड़ से अधिक घरों में बिजली कनेक्शन का भी जिक्र आया.
स्वच्छ भारत अभियान के जरिए शौचालय निर्माण का भी वित्त मंत्री ने जिक्र किया और कहा कि इसके जरिए महिलाओं की सुरक्षा और उनकी सुविधा का सरकार ने पूरा ध्यान रखा है और इस दिशा में बचे हुए काम भी जारी हैं.

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