पंजाब

बदनौर और कैप्टन द्वारा सरदार बेअंत सिंह इंडिया इंटरनेशनल सैंटर के लिए सैद्धांतिक मंजूरी

यह केंद्र चंडीगढ़ की ज़मीन पर स्मारक के साथ ही स्थापित किया जाएगा

चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पंजाब के राज्यपाल और यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक वी.पी. सिंह बदनौर के साथ मिलकर चंडीगढ़ के सैक्टर-42 स्थित बेअंत सिंह स्मारक और चंडीगढ़ सैंटर ऑफ परफॉरमिंग एंड विजूअल आर्टस के मौजूदा स्थान पर इंडिया इंटरनेशनल सैंटर (आई.आई.सी.) स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री जिनको 1995 में एक कार बम धमाके के दौरान शहीद कर दिया गया था, के परिवार को इस प्रस्तावित सेंटर संबंधी कोई भी ऐतराज़ नहीं है अगर इस स्मारक की मर्यादा को हर कीमत पर बनाए रखा जाये।यह प्रस्तावित सैंटर दिल्ली के आई.आई.सी. की तजऱ् पर विकसित किया जायेगा। इसको स. बेअंत सिंह इंडिया इंटरनेशनल का नाम दिया जायेगा। इस प्रोजैक्ट को पंजाब सरकार और यू.टी. प्रशासन द्वारा बराबर हिस्से की लागत से बनाया जायेगा।यह फ़ैसला बेअंत सिंह स्मारक सोसाइटी और चंडीगढ़ सैंटर फॉर प्रफॉरमिंग एंड विजूअल आर्टस की मीटिंग के दौरान लिया गया जिसमें पंजाब और चंडीगढ़ के अन्य नुमायंदों के साथ राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।राज्यपाल ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित सैंटर दोनों पंजाब और चंडीगढ़ की सरकार/प्रशासन से आज़ाद होगा। उन्होंने कहा कि इसकी मैंबरशिप मुहिम जल्द ही शुरू की जायेगी।चंडीगढ़ इंडिया इंटरनेशनल सैंटर, बेअंत सिंह स्मारक के साथ ही विकसित करने का प्रस्ताव है जिसमें मीडिया सैंटर होगा जिसका ढांचा और मौजूदा लाइब्रेरी और कॉन्फ्ऱेंस हॉल तैयार है। मीडिया सैंटर की इमारत का पुन: नामकरण किया जायेगा जिसमें एक रैस्टोरैंट और कैफेटेरिया के अलावा एक कन्वेंशन सैंटर होगा। यह प्रस्तावित मेमोरियल-कम -इंटरनेशनल सैंटर का हिस्सा होंगे।
यह स्मारक स्थापित करने का फ़ैसला बेअंत सिंह की हत्या के कुछ महीने बाद ही 1996 में लिया गया था। इसको स्वर्गीय बेअंत सिंह की याद में विकसित करने का फ़ैसला लिया गया था। जबकि ली कोरबुजऱ की नीति के अनुसार चंडीगढ़ के सार्वजनिक क्षेत्र में किसी महत्वपूर्ण शख्सियत का कोई भी प्रतिमा स्थापित न करना था परंतु इसके बावजूद सरदार बेअंत सिंह स्मारक बनाने का फ़ैसला लिया गया। इसी दौरान चंडीगढ़ सैंटर फॉर परफॉरमिंग एंड वीजूअल आर्टस बनाने की योजना बनाई गई क्योंकि चंडीगढ़ शहर में ऐसी सांस्कृतिक हब के लिए इसकी ज़रूरत थी।बेअंत सिंह मेमोरियल और चंडीगढ़ सैंटर फॉर परफारमिंग एंड वीजूअल आर्टस की मीटिंग 12.10.1996 को उस समय के चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार की अध्यक्षयता अधीन हुई थी। इस मीटिंग में यह फ़ैसला लिया गया था कि दो सुसाईटियों (एक बेअंत सिंह मेमोरियल और दूसरी चंडीगढ़ सैंटर फॉर परफॉरमिंग एंड वीजूअल आर्टस) की जगह एक ही सुसाइटी बनाई जाये क्योंकि सरदार बेअंत सिंह परफॉरमिंग एंड वीजूअल आर्टस के महान सरपरस्त थे। इसके अनुसार एक सोसाइटी सरदार बेअंत सिंह मेमोरियल एंड चंडीगढ़ सैंटर फॉर परफॉरमिंग एंड वीजूअल आर्टस सोसाइटी 26.11.1996 को रजिस्टर्ड कराई गई।इस प्रोजैक्ट के पहले पड़ाव के दौरान 18.55 करोड़ रुपए की राशि ख़र्च की गई है। पंजाब सरकार का कुल योगदान तकरीबन आठ करोड़ रुपए है जबकि चंडीगढ़ प्रशासन ने 12.69 करोड़ का योगदान डाला है।मीटिंग में स्वर्गीय मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के परिवार के मैंबर एम.पी. लुधियाना रवनीत बिट्टू, विधायक खन्ना गुरकीरत सिंह कोटली और तेज प्रकाश सिंह शामिल थे। उनके अलावा इस मीटिंग में पंजाब के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, मुख्य सचिव पंजाब करन अवतार सिंह, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तेजवीर सिंह, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार श्री मनोज परिदा, मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह, प्रमुख सचिव गृह चंडीगढ़ अरुण कुमार गुप्ता, वित्त सचिव चंडीगढ़ प्रशासन अजोए सिन्हा, मुख्य इंजीनियर चंडीगढ़ प्रशासन मुकेश आनंद, चीफ़ आर्कीटैक्ट शहरी योजनाबंदी चंडीगढ़ एस.के सेतिया, चीफ़ आर्कीटैक्ट पंजाब सपना शामिल थे।

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