मुख्य सचिव को प्रोग्राम पर निगरानी रखने के निर्देश, समस्या के ख़ात्मे के लिए भारत सरकार के समर्थन की माँग
चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य में आवारा कुत्तों की बढ़ रही समस्या से निपटने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के नेतृत्व में एक कार्यकारी ग्रुप का गठन किया है। राज्य में कुत्तों द्वारा काटने की बढ़ रही समस्या पर विचार-विमर्श के लिए एक उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षयता करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस समस्या के ख़ात्मे के लिए भारत सरकार से समर्थन प्राप्त करने के लिए संभावनाओं का पता लगाने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में सभी डिप्टी कमीश्नरों को दी गई कार्य योजना के अधीन निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति और इसको लागू करने सम्बन्धी प्रगति पर नियमित रूप से निगरानी रखने के लिए भी मुख्य सचिव को कहा है। इस कार्यकारी ग्रुप का गठन समस्या के हल के लिए सुझाव देने के लिए किया गया है और इसको दो हफ़्तों में अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। परिणाम मुखी तरीके से आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप देने का काम इस ग्रुप को सौंपा गया है और कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए समयबद्ध रणनीति पर ज़ोर दिया गया है। प्रमुख सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायत इस ग्रुप के मैंबर होंगे। प्रमुख सचिव पशु पालन इसके कनवीनर और गुरू अंगद देव वेटेनरी एंड एनिमल साईंसज़ यूनिवर्सिटी (गडवासू) के वाइस चांसलर इसके लिए तकनीकी समर्थन मुहैया करवाएंगे।
गंभीर स्थिति पर पहुँची इस बढ़ रही समस्या पर चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने पशु पालन और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभागों के प्रमुख सचिवों को साझी रणनीति अधीन काम करने और मरे हुए पशूओं के लिए हड्डा रोड़ीयों की जगह अत्याधुनिक प्लांट स्थापित करने के लिए साझी रणनीति पर काम करने के लिए कहा है क्योंकि यह हड्डा रोड़ीयां आवारा कुत्तों का अड्डा बनती हैं। मुख्यमंत्री ने मरे हुए पशूओं के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे के लिए नगर निगमों और ग्राम पंचायतों में यह निपटारा प्लांट स्थापित करने के लिए इन अधिकारियों को कहा है। मुख्यमंत्री ने आवारा कुत्तों को नपुंसक करने में तेज़ी लाने के लिए प्रमुख सचिव पशु पालन को कहा है।
इस दौरान प्रमुख सचिव पशु पालन ने मुख्यमंत्री को बताया कि साल 2017 में कुत्तों के काटने के 1,12,431 मामले सामने आए जबकि 2018 के दौरान 1,13,637 मामले सामने आए। इनमें से अकेले लुधियाना में क्रमवार 13,185 और 15,324 घटनाएँ घटीं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि कुत्तों की कुल 4.70 लाख की जनसंख्या में से आवारा कुत्तों की संख्या 3.05 लाख है। मीटिंग में यह भी बताया कि साल 2017 में 1,20,000 यूनिट एंटी रैबीज़ वैक्सीन जारी की गई जबकि 2018 में 1,98,780 यूनिट जारी किये गए। कुत्तो के काटने के ईलाज के लिए 195 एंटी रैबीज़ सैंटर स्थापित किये गए हैं।आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय निकाय विभाग की सरगर्मियों का वर्णन करते हुए डायरैक्टर स्थानीय निकाय ने मुख्यमंत्री को बताया कि कुल 167 शहरी स्थानीय संस्थाओं में से 110 ने 30 सितम्बर, 2019 से पहले कुत्तों को नपुंसक करने का काम शुरू करने के लिए प्रस्ताव पारित किये हैं। अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, मोहाली, होशियारपुर, पठानकोट, ज़ीरकपुर और मंडी गोबिन्दगढ़ की नौ शहरी स्थानीय संस्थाओं में कुत्तों संबंधी बड़े स्तर पर ए.बी.सी (पशु जन्म नियंत्रण) प्रोग्राम चल रहा है। विचार-विमर्श में हिस्सा लेते हुए गडवासू के वाइस चांसलर ने कुत्तो की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए लोगों के सम्मिलन को यकीनी बनाने और इस प्रोग्राम को मिशन के आधार पर चलाने पर ज़ोर दिया है। उन्होंने पशु पालन विभाग को भरोसा दिलाया कि आवारा कुत्तों की समस्या के नियंत्रण संबंधी चल रहे प्रोग्रामों में उनको हर संभव तकनीकी समर्थन और सहयोग दिया जायेगा। मीटिंग में उपस्थित अन्यों में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, ए.सी.एस स्वास्थ्य सतीश चंद्र, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, प्रमुख सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायत डी.के. तिवाड़ी, प्रमुख सचिव पशु पालन राज कमल चौधरी, डायरैक्टर ग्रामीण विकास एवं पंचायत जसकीरत सिंह, डायरैक्टर स्थानीय निकाय करनेश शर्मा और वाइस चांसलर गडवासू डा. ए.एस. नन्दा शामिल थे।