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उत्तर प्रदेश में बिखरा सपा-बसपा का महागठबंधन

उत्तर प्रदेश की अपनी जनसभाओं में पीएम मोदी जिस बात को लगातार कह रहे थे. चुनाव नतीजों के बाद कुछ ऐसा ही हुआ. लोकसभा चुनावों से पहले जनवरी में बना समाजवादी पार्टी-बीएसपी का गठबंधन फिलहाल टूट गया है और दोनों पार्टियों ने अलग-अलग रास्ते अख्तियार कर लिए हैं. मायावती ने साफ किया कि 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले संभावित उपचुनाव में वो अकेले दम पर ल़ड़ेंगी.मायावती यही नहीं रुकीं. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का वोट बैंक बीएसपी को ट्रांसफर नहीं हुआ. मायावती ने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि सपा के लोगों में काफी सुधार लाने की जरूरत है.गठबंधन को फिलहाल ‘होल्ड’ पर रखने के मायावती के एलान के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपनी राह अलग करने का संकेत देते हुए कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर अकेले उपचुनाव लड़ेगी. अखिलेश ने कहा कि अगर रास्ते अलग-अलग हैं, तो उसका भी स्वागत है.गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में भाजपा को 62 और सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को 15 सीट मिली. इनमें 10 सीट बसपा को और सपा को पांच सीट मिल सकीं. इन नतीजों के बाद ही मायावती ने ये फैसला लिया है. सपा-बसपा गठबंधन के फैसले पर बीजेपी ने गठबंधन पर जमकर हमला तमाम और दलों ने भी गठबंधन के टूटने पर प्रतिक्रिया दी है.चुनाव के पहले होने वाले गठबंधन पहले भी तमाम मौकों पर नतीजों के बाद टूटे हैं लेकिन यूपी के गठबंधन के प्रयोग को कई सियासी पंडित काफी अहमियत दे रहे थे. हालांकि 23 मई को चुनावी नतीजों और अब दोनों दलों के अलग-अलग राह पकड़ने के बाद सियासी पंडितों के तमाम दावों की भी हवा निकल गई है.

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