भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक
को-ऑपरेशन यानी ओआईसी की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने
आतंकवाद पर जोरदार प्रहार किया और पूरी दुनिया से इससे मिलकर लडने की अपील
की।
आतंकवाद के खिलाफ जंग और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को
अलग-थलग करने की मुहिम में भारत को आज एक और बड़ी कामयाबी मिली है। आज पहली
बार भारत की विदेश मंत्री इस्लामिक देशों के संगठन में शामिल हुई।
इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी में भारत को निमंत्रण का पाकिस्तान ने
पुरजोर विरोध किया और यहां तक कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत के
शामिल होने के विरोध में बैठक का बहिष्कार भी किया, लेकिन ओआईसी अपने फैसले
पर कायम रहा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ओआईसी के मंच पर आतंकवाद के
खिलाफ जोरदार हमला बोला और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी मजहब के
खिलाफ नहीं है।
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन यानी ओआईसी की बैठक में भारतीय विदेश
मंत्री सुषमा स्वराज ने आतंकवाद पर जोरदार प्रहार किया और पूरी दुनिया से
इससे मिलकर लडने की अपील की। संगठन की दो दिवसीय बैठक के उद्घाटन सत्र में
विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुई सुषमा स्वराज ने कहा कि आतंकवाद के
खिलाफ लड़ाई किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह महामारी
‘धर्म को तोड़मरोड़ कर पेश करने और भ्रमित आस्था’ के कारण पनपती है।
करीब
17 मिनट के अपने भाषण में सुषमा स्वराज ने संगठन के तमाम देशों को आतंकवाद
के खतरे के प्रति आगाह किया और बताया कि कैसे इसका दायरा बढ रहा है। विदेश
मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ केवल सैन्य अभियान और कूटनीति से नहीं
लड़ा जा सकता बल्कि धर्म के सही मायने समझकर इससे लड़ा जा सकता है। सुषमा
स्वराज ने किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वालों को
रोकना होगा।
57 सदस्यीय इस्लामिक समूह की बैठक के इस अहम मंच से
सुषमा स्वराज ने देश की विविधता का जिक्र किया और कहा कि हमारे देश में
हिंदू और मुस्लिम सौहार्द के साथ रहते हैं और ऐसे बहुत कम लोग हैं जो
कट्टरवाद के चंगुल में फंस गए हैं।
इस्लामिक देशों के इस समूह ने
पहली बार अपनी बैठक में भारत को आमंत्रित किया है। सुषमा स्वराज को विशिष्ट
अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया । हालांकि पाकिस्तान ने भारत को
आमंत्रित करने का विरोध किया लेकिन उसे यहां भी मुंह की खानी पडी और उसका
विरोध दरकिनार कर दिया गया जिसके बाद पाकिस्तान ने बैठक में हिस्सा ही नहीं
लिया। विदेश मंत्री ने संबोधन की शुरुआत में ही कहा कि ओआईसी की बैठक में
विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना भारत के लिए सम्मान की बात
है। उन्होंने कहा कि पिछले साढे चार सालों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात ,
तमाम खाड़ी देशों तथा पश्चिम एशियाई क्षेत्रों के साथ भारत के संबंध
प्रगाढ़ हुए हैं।