जीएसटी परिषद ने रियल स्टेट सेक्टर में जीएसटी दरें घटाने के प्रस्ताव
को दी मंज़ूरी। निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर
5 प्रतिशत, जबकि किफायती मकानों पर जीएसटी की दर को घटाकर महज 1 प्रतिशत
किया गया। नई दरें आगामी 1 अप्रैल से होंगी प्रभावी।
माल एवं सेवा
कर (जीएसटी) परिषद ने रीयल एस्टेट क्षेत्र में मांग को बढ़ावा देने के लिए
निर्माणाधीन परियोजनाओं में मकानों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर
पांच प्रतिशत कर दी है और इसमें इनपुट कर का लाभ खत्म करने का फैसला किया
है। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने रविवार को यहां जीएसटी परिषद की बैठक के
बाद इस फैसले की जानकारी दी। साथ ही किफायती दर के मकानों पर भी जीएसटी दर
को आठ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत करने का फैसला किया गया है।
इसके
साथ ही परिषद ने निर्माणाधीन और कंप्लीशन सर्टिफिकेट से पहले भवनों की
बिक्री पर इनपुट कर छूट (आईटीसी) को समाप्त करने का निर्णय भी किया। रीयल
एस्टेट बाजार में नकदी के धंधे पर अंकुश लगाने के लिए बिल्डरों को निर्माण
सामग्री का एक बड़ा हिस्सा जीएसटी में पंजीकृत डीलरों से खरीदना अनिवार्य
करने का भी फैसला किया गया है। रीयल एस्टेट पर जीएसटी की ये नयी दरें एक
अप्रैल, 2019 से लागू होंगी। वित्त मंत्री ने बताया कि लॉटरी पर जीएसटी के
बारे में फैसला आगे के लिए टाल दिया गया है। इस बारे में प्रस्ताव पर चर्चा
के लिए मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठक फिर होगी।
इस समय राज्य
सरकारों द्वारा संचालित लॉटरी योजनाओं पर 12 प्रतिशत एवं राज्य सरकारों
द्वारा अधिकृत लॉटरी पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। जीएसटी परिषद
की 33वीं बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए जेटली ने कहा कि
उपभोक्ताओं को लग रहा था कि बिल्डर इनपुट कर पर छूट का लाभ उन्हें दे रहे
थे। इसीलिए रीयल एस्टेट क्षेत्र में कर प्रणाली में बदलाव की सिफारिश के
लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया था।
जेटली ने कहा, “परिषद ने
निर्णय किया है कि इनपुट कर पर छूट को समाप्त करने के बाद सामान्य आवासीय
परियोजनाओं के लिए पांच प्रतिशत की दर रहेगी, जबकि आवासीय परियोजनाओं के
लिए यह एक प्रतिशत रहेगी।” वित्त मंत्री ने कहा कि इनपुट कर पर छूट खत्म
होने के बाद रीयल एस्टेट क्षेत्र का कारोबार फिर से पहले की तरह नकद लेनदेन
का धंधा ना बन जाए, इसके लिए बिल्डर कंपनियों को निर्माण सामग्री का एक
बहुत ऊंचा हिस्सा जीएसटी में पंजीकृत डीलरों से खरीदना अनिवार्य किया
जाएगा। यह हिस्सा कितना प्रतिशत रखा जाए, यह एक समिति द्वारा तय किया
जाएगा।
मंत्रियों के समूह ने यह सीमा 80 प्रतिशत रखने का सुझाव
दिया है। उन्होंने कहा कि आज के फैसले से आवास निर्माण क्षेत्र को बल
मिलेगा और नव-मध्यम वर्ग को अपने मकान के सपने को पूरा करने में मदद
मिलेगी। इस फैसले से मकान खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।