कुंभ मेले में कल्पवासी तीर्थयात्रियों के लिए माघ पूर्णिमा को
महीने भर चलने वाली तपस्या का समापन माना जाता है. शाही स्नान नहीं होने के
बावजूद इसे एक पर्व स्नान माना जाता है.
हर-हर महादेव और गंगा
मैया की जय के उद्घोष के साथ लाखों श्रद्धालुओं ने माघ पूर्णिमा के शुभ
अवसर पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर मंगलवार को डुबकी लगाई.
तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पवित्र स्नान शुरू कर दिया.
माघ
पूर्णिमा के महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार
ने माघ पूर्णिमा पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की. इस मौके पर सवा करोड़ से
अधिक श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान करने का अनुमान है. स्नानार्थियों के
लिए मेला क्षेत्र में सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था भी की गई. पुलिस के
अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान लगातार चप्पे-चप्पे पर नज़र रखे हुए
हैं.
स्नान करने आए श्रद्धालु सरकार की तरफ से किए गए इंतजामों से काफी खुश नजर आए.
दरअसल
कल्पवासी तीर्थयात्रियों के लिए माघ पूर्णिमा को महीने भर चलने वाली
तपस्या का समापन माना जाता है. शाही स्नान नहीं होने के बावजूद माघ
पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा और महाशिवरात्रि की तरह ही एक पर्व स्नान कहा
जाता है और यह कुंभ के दौरान होने वाले छह महत्वपूर्ण स्नान दिवसों का
हिस्सा है. ऐसा माना जाता है कि शुभ दिन पर गंगा में स्नान करने से सभी पाप
धुल जाते हैं.
मेले का अंतिम स्नान महाशिवरात्रि आगामी 4 मार्च को पड़ेगा और इसके साथ कुंभ मेला संपन्न हो जाएगा.