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पाकिस्‍तान की राजनीति में ISI और सेना की दखल नहीं रोक सकेगा सुप्रीम कोर्ट

पाकिस्‍तान की सुप्रीम कोर्ट ने खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना को सियासत से अलग रहने का निर्देश दिया है। राजनीतिक हलकों में इस आदेश का खासा महत्‍व है, लेकिन यह बात भी ध्‍यान रखने वाली इस तरह का फैसला कोर्ट ने पहली बार नहीं दिया है। पहले भी कोर्ट आईएसआई और सेना को लेकर तिखी टिप्‍पणी की है। लेकिन इन सभी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस आदेश का कितना असर इन दोनों पर पड़ता है।जहां तक जानकारों की राय है तो वह मानते हैं कि सेना और आईएसआई के बिना पाकिस्‍तान में कोई भी सरकार न तो आती है और न ही ज्‍यादा समय तक रह सकती है। जहां तक आईएसआई और सेना की बात है तो हमेशा से ही पाकिस्‍तान में इनका दबदबा रहा है। इसकी एक वजह ये भी है कि पाकिस्‍तान में अधिकतर शासन सेना के ही हाथों में रहा है। वहीं आईएसआई का काम सेना की सहायता करना रहा है। यही वजह है कि यह दोनों एक ही सिक्‍के के दो पहलू हैं।आपको यहां पर बता दें कि जिस आईएसआई पर पाकिस्‍तान की सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं उसपर मुंबई हमले का आरोपी डेविड हेडली भी आरोप लगा चुका है। उसने कहा था कि आईएसआई आतंकवादी संगठनों को वित्तीय और सैनिक मदद देती है। जहां तक सुप्रीम कोर्ट की बात है तो पिछले वर्ष भी इसी तरह की बात उस वक्‍त सामने आई थी जब कोर्ट ने आईएसआई पर तंज कसते हुए कहा था कि आप देश की सर्वोच्‍च एजेंसी हैं लिहाजा देश को मजाक का जरिया न बनाए तो बेहतर होगा। कोर्ट ने देश में हो रहे विरोध के फलस्‍वरूप इस तरह का तंज कसा था। आईएसआई की पाकिस्‍तान में अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष आईएसआई पर तंज कसने के चलते हाईकोर्ट के जज शौकत अजीज सिद्दकी को पद से हटा दिया गया था।

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