पंजाब

बैंकों और सरकारी विभागों द्वारा ऋण संभाव्यताओं की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार का रहेगा सहयोग: सुखजिंदर सिंह रंधावा

2019-20 के लिए नाबार्ड द्वारा तैयार स्टेट फोकस पेपर किया जारी

चंडीगढ़ – पंजाब के सहकारिता मंत्री स. सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आज चंडीगढ़ में आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार में वर्ष 2019-20 के लिए नाबार्ड द्वारा तैयार स्टेट फोकस पेपर जारी किया। इस सेमिनार में श्री विश्वजीत खन्ना अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त विकास, श्रीमती रचना दीक्षित, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक, श्री संजय कुमार, महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक और श्री पी के आनंद, महाप्रबन्धक – संयोजक एसएलबीसी, पंजाब एवं इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, वरिष्ठ बैंकरों, गैर सरकारी संगठनों, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों तथा प्रगतिशील किसानों ने भी सेमिनार में भाग लिया। श्री जेपीएस बिन्द्रा, मुख्य महाप्रबन्धक नाबार्ड पंजाब क्षेत्रीय कार्यालय,चंडीगढ़ ने सेमिनार में स्टेट फोकस पेपर की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला। सहकारिता मंत्री द्वारा स्टेट फोकस पेपर जारी किया गया। स. सुखजिंदर सिंह रंधावा ने स्टेट फोकस पेपर जैसे एक संरचित और व्यापक दस्तावेज तैयार करने के लिए नाबार्ड के प्रयासों की सराहना की, जिसमें अर्थव्यवस्था के प्रत्येक उप-क्षेत्र में उपलब्ध संभाव्यताओं को दर्शाया गया है।उन्होंने विशेष रूप से एसएचजी के गठन में एवं किसानों के सामूहिक रूप से एफपीओ आदि बनाकर राज्य के विकास में नाबार्ड की भूमिका की सराहना की। उन्होंने बैंकों और सरकारी विभागों द्वारा ऋण संभाव्यताओं की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार के सहयोग का आश्वासन दिया। यह उल्लेखनीय है कि नाबार्ड ने पंजाब राज्य में प्राथमिकता क्षेत्र के तहत वर्ष 2019-20 के दौरान 2,27,935 करोड़ रूपए के सम्भावित ऋणों का अनुमान प्रस्तुत किया है जोकि वर्ष 2018-19 के 198737 करोड़ रूपए के ऋण अनुमानों से 5त्न अधिक है।इन अनुमानों में फसल ऋण का अनुमानित शेयर 97577 करोड़ रूपए है जो कुल अनुमानित ऋण सम्भाव्यता का 43 प्रतिशत है। फोकस पेपर में सेक्टर-वार अनुमानित ऋण सम्भाव्यताएं भी प्रस्तुत की गई हैं जोकि कृषि बुनियादी ढांचे के लिए (6490 करोड़ रूपए), कृषि सहायक इकाइयां (14963 करोड़ रूपए), कृषि सावधि ऋण (23407 करोड़ रूपए), एमएसएमई ऋण (41129 करोड़ रूपए), निर्यात ऋण (15566 करोड़ रूपए), शिक्षा ऋण (5995 करोड़ रूपए), आवास ऋण (14785 करोड़ रूपए) हैं। श्री जेपीएस बिन्द्रा मुख्य महाप्रबन्धक नाबार्ड पंजाब क्षेत्रीय कार्यालय,चंडीगढ़ ने सेमिनार में स्टेट फोकस पेपर की प्रमुख विशेषताओं को प्रस्तुत करते हुए कहा किइस वर्ष स्टेट फोकस पेपर का थीम ‘सतत कृषि प्रथाएं’ रखा गया है। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए सतत कृषि प्रथाएं समय की जरुरत हैं। उन्होंने कृषि में पूंजी निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया और बैंकों और सम्बन्धित विभागों को निवेश गतिविधियों के लिए किसानों को और अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, नाबार्ड सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान करने के साथ-साथ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए राज्य सरकार को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए, नाबार्ड ने बैंकों और सरकारी विभागों के माध्यम से वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम, ग्रामीण स्तर के कार्यक्रमों और गो डिजिटल कार्यक्रम आयोजित किए हैं ताकि ग्रामीण लोगों को डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता के बारे में जागरूक किया जा सके। वर्ष के दौरान, नाबार्ड ने किसानो को भूमि के कुशल उपयोग के बारे में जागरूक करने के लिए राज्य के 4000 गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम – पराली बचाओ,फसल वधाओ का शुभारंभ किया। उन्होंने बैंकों और सम्बन्धित विभागों से अपील की कि वे आपसी तालमेल से काम करें और नाबार्ड द्वारा अनुमानित ऋण संभावनाओं का अधिकतम दोहन करें ताकि किसान / ग्रामीण इससेलाभान्वित हो सके। श्रीमती रचना दीक्षित, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय समावेशन निधि के तहत कई गतिविधियों के माध्यम से वित्तीय साक्षरता के लिए नाबार्ड के प्रयासों की सराहना कीऔर नाबार्ड द्वारा प्रदान किए गए मंच की भी सराहना की जहां सभी महत्वपूर्ण हितधारक नए विचारों को बढ़ावा देने और स्टेटफोकस पेपर में परिकल्पित लक्ष्यों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित होते हैं। महाप्रबन्धक-संयोजक एसएलबीसी, ने कृषि में दीर्घकालिक ऋण के वित्तपोषण की आवश्यकता के लिए अधिक उत्तरदायी होने की आवश्यकता को स्वीकार किया जिससे राज्य में किसानों की बेहतरी का मार्ग प्रशस्त होगा। इस अवसर पर स्टेट फोकस पेपर में पहचान की गई ऋण संभाव्यताओं और बुनियादी ढांचे की कमियों के बारे में एवंराज्य में महिलाओं और किसानों के उत्थान के लिए विभिन्न प्रयासों के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया।

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