पंजाब

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य की अनाज खऱीद प्रक्रिया से एफ.सी.आई. के क्रमवार पीछे हटने का मुद्दा केंद्र के पास उठाने का फैसला

राज्य के खऱीद कामों से पंजाब एग्रो को हटाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी

चंडीगढ़ – राज्य में से अनाज की खऱीद से भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) की तरफ से क्रमवार ढंग से पीछे हटने पर चिंता प्रकट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने यह मुद्दा केंद्र के पास उठाने का फ़ैसला किया है और खऱीद में केंद्रीय एजेंसी का हिस्सा बढ़ाने की माँग की है।मुख्यमंत्री ने यह प्रगटावा आगामी रबी के सीजन के लिए खरीद प्रबंधों का जायज़ा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए किया।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वह सूबे में खऱीद के लिए एफ.सी.आई. का हिस्सा बढ़ाने के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री को कहेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों के दौरान यह हिस्सा 30.69 प्रतिशत से कम होकर केवल 12 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि एफ.सी.आई. पिछले 10 सालों के दौरान सीजन के शुरू में खऱीद संबंधी फ़ैसला होने के बावजूद आखिरी समय खरीद से पीछे हटती आई है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि एफ.सी.आई. प्राथमिक खरीद एजेंसी है जिसने राष्ट्र के लिए अनाज भंडारण को यकीनी बनाना है। इसलिए इसको अनाज खरीद प्रक्रिया में लगातार सक्रियता से शामिल रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एफ.सी.आई. का हिस्सा लगातार घटता जा रहा है जिससे समुची खऱीद प्रक्रिया की वित्तीय स्थिति पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और इसके साथ पंजाब पर बोझ बढ़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एफ.सी.आई. की तरफ से पहले तय किये गये हिस्से की खऱीद से आखिऱी समय पर न करने से राज्य के वित्त पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने चार प्रांतीय खऱीद एजेंसियों – मार्कफैड, पनसप, पी.एस.डबल्यू.सी. और पंजाब राज्य एग्रो इंडस्ट्रीज (पी.ए.आई.सी.)- को क्रमवार खऱीद संबंधी कामों से हटाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है जिसकी शुरुआत पी.ए.आई.सी. से होगी। इसका उद्देश्य इन चार खऱीद एजेंसियाँ का ध्यान इनके एकमात्र मूल कार्य पर केंद्रित करना है जो खेती आधारित उत्पादों और सहकारी लहर को प्रौत्साहन देने से सम्बन्धित है।भारत सरकार के साथ अनाज की खरीद के लम्बित मुद्दों के जल्दी हल के मद्देनजऱ कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वह केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्रीय खाद्य मंत्री को पत्र लिखकर सांझी मीटिंग की माँग करेंगे।31000 करोड़ रुपए के नगद हद कजऱ्े (सी.सी.एल.) को मियादी कजऱ् के तौर पर वहन करने के लिए राज्य को मजबूर किये जाने के बावजूद राज्य और केंद्र के मध्य ढांचागत मुद्दा न सुलझने का हवाला देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सभी बकाया मसलों को जल्द से जल्द एक ही बार में सुलझाने के लिए वह मोदी सरकार से अपील करेंगे।मौजूदा सरकार के सत्ता में आने से लेकर अब तक फसलों की निर्विघ्न खरीद संबंधी कामों को यकीनी बनाने के लिए खाद्य और सिविल सप्लाई विभाग की सराहना करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने खाद्य सचिव को कहा कि भारत सरकार के पास अनाज की ढुलाई की प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर ज़ोर डाला जाये जिससे रबी के मंडीकरण सीजन 2019 -20 के दौरान गेहूँ के भंडारण के लिए और जगह बन सके।रबी के आगामी सीजन के लिए उचित बंदोबस्त करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने ख़ाद्य और सिविल सप्लाईज़ मंत्री को कहा कि फ़सल की समयबद्ध और निर्विघ्न खरीद के लिए समूचे स्टाफ की मुकम्मल तैयारी को यकीनी बनाएं जिससे किसानों का भरोसा जीता जा सके।अनाज के नुक्सान से राज्य को होते वित्तीय घाटे पर चिंता ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने विभाग को वैज्ञानिक ढंग से अनाज का भंडारण करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए कहा।मीटिंग के दौरान खाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग के सचिव ने बताया कि राज्य की तरफ से रबी के मंडीकरण सीजन 2019 -20 के दौरान 130 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीदने की आशा है जिसमें से राज्य की खरीद एजेंसियाँ 104 लाख मीट्रिक टन खऱीदेंगी।इस मौके पर सहकारिता मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा, खाद्य और सिविल सप्लाईज़ मंत्री भारत भूषण आशु, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, प्रमुख सचिव वित्त अनिरूद्ध तिवाड़ी, अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता विसवाजीत खन्ना, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, ख़ाद्य और सिविल सप्लाई के सचिव के.ए.पी. सिन्हा और खाद्य और सिविल सप्लाई के डायरैक्टर अनिन्दिता मित्रा उपस्थित थे।

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