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तो इस वजह से कुक ने लिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास

लंदनः इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज एलिस्टेयर कुक ने कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का फैसला इसलिए लिया क्योंकि उन्होंने उस मानसिक फूर्ती को खो दिया था जिससे उन्होंने अपने करियर के दौरान आसानी से काम किया था। भारत के खिलाफ ओवल मैदान पर खेले जाने वाले मौजूदा टेस्ट श्रृंखला के पांचवें और आखिरी मैच के बाद उन्होंने संन्यास लेने की घोषणा की है। श्रृंखला में इंग्लैंड की टीम 3-1 से आगे है।

खो रहा था मानसिक फूर्ती
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर पिछले 12 साल से इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व कर रहे कुक ने कहा, ‘‘मेरी मानसिक फूर्ती अधिक रही है। मैं हमेशा मानसिक रूप से मजबूत रहा हूं लेकिन अब मेरी मानसिक फूर्ती कम हो रही है और फिर से उस फूर्ती को पाना काफी मुश्किल है।’’ कुक ने कहा कि अगर साउथम्प्टन में मैच के बाद श्रृंखला का फैसला नहीं होता तो वह अपने संन्यास के फैसले को साझा नहीं करते।

उम्मीद है कि 5वें टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करूं
उन्होंने कहा, ‘‘सच कहूं तो मेरे एक दोस्त ने यह जानने के लिए मुझे फोन किया कि मैं जिंदा हूं क्योंकि हर कोई ऐसे बात कर रहा जैसे मैं जिंदा नही हूं। जब आप अपने बारे में बहुत अच्छी बातें सुनते है तो अच्छा लगता है। उदाहरण के तौर पर, जब मैं गाड़ी चला रहा था और किसी ने मुझसे खिड़की के शीशे को नीचे करवा कर कहा कि ‘बहुत बहुत धन्यवाद’। यह आपके अच्छे पलों में से एक है। उम्मीद है कि अलविदा कहने से पहले इस सप्ताह मैं कुछ रन बना सकूं।’’ अगर सीरीज 2-2 पर होती तो संन्यास की बात शेयर ना करते कुक
उन्होंने कहा, ‘‘ यह कहना मुश्किल है लेकिन पिछले छह महीनो से मैंने ऐसे संकेत दे दिये थे। मैंने पिछले मैच से पहले कप्तान जो रूट से और मैच के दौरान कोच ट्रेवर बेलिस को इस बारे में बता दिया था। आज के दौर और इस उम्र में सब कुछ छुपा कर रखना काफी मुश्किल है। अगर श्रृंखला 2-2 से बराबरी पर होती तो मैं अपने फैसले को साझा नहीं करता।’’ कुक ने 59 टेस्ट और 92 एकदिवसीय में टीम में कप्तानी की है। जिसमें से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में एशेज श्रृंखला में जीत (2010-10 में एंड्रयू स्ट्रॉस की कप्तानी में) के साथ अपनी कप्तानी में भारत में श्रृंखला जीत को करियर की सबसे बड़ी सफलता बताया।

पीटरसन के साथ हुआ विवाद पर बोले कुक…
उन्होंने कहा, ‘‘ विदेश में इन दोनों श्रृंखलाओं में मैं मैन ऑफ द सीरीज था और हम भारत तथा ऑस्ट्रेलिया में जीते थे। मेरे करियर के दौरान यह सर्वश्रेष्ठ क्षण था। हां, मैं कभी भी सबसे प्रतिभाशाली क्रिकेटर नहीं रहा हूं लेकिन अपनी क्षमता से मैंने सबकुछ पाया है।’’ उन्होंने केविन पीटरसन के साथ विवाद पर खेद जताया क्योंकि उन्हें टीम से बाहर करने के फैसले में वह भी शामिल थे। उन्होंने कहा, ‘‘ निस्संदेह ऐसे प्रश्न हैं जिन पर आप सवाल करते हैं। स्पष्ट रूप से पीटरसन विवाद एक कठिन समय था, इसमें कोई संदेह नहीं है। उस फैसले से आयी गिरावट न तो इंग्लैंड क्रिकेट के लिए अच्छा थी न ही मेरे लिए।’’

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