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मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बालिका आश्रय गृह के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जहां केंद्र सरकार और बिहार सरकार के अलावा महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस जारी किया है, तो पीडितों की पहचान जारी न करने के लिए मीडिया को भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और बिहार सरकार के अलावा महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और अन्य को नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने घटना पर हैरानी जताते हुए मामले को उजागर करने वाले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को पूरी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को आश्रय गृह में फॉरेंसिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी पीड़िताओं से पूछताछ के दौरान पेशेवर काउंसलर और योग्य बाल मनोचिकित्सकों की मदद लेगी। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के बार-बार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आने और नाबालिग रेप पीड़िताओं की तस्वीर दिखाने पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किया है।

पीड़ित लड़कियों का मीडिया द्वारा बार-बार साक्षात्कार लिए जाने पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें बार-बार अपने अपमान को दोहराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पीड़िताओं की तस्वीरों का रूप बदलकर या अस्पष्ट रूप से भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित नहीं किया जा सकता है. अदालत ने ये भी निर्देश दिए हैं कि पीड़ित बच्चियों की पहचान उजागर नहीं होनी चाहिए। बालिका गृह का कोई भी वीडियो फुटेज मीडिया में नहीं चलाया जाएगा। वकील अपर्णा भट्ट को इस मामले की एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए उन्हें मामले की मॉनिटरिंग के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी पारदर्शिता से जांच होनी चाहिए। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले 26 जुलाई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुके हैं, जिस पर सीबीआई प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर चुकी है, मामले में बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर, बालिका गृह की अधीक्षिका इंदु कुमारी समेत नौ लोगों को जेल भेजा जा चुका है। दरअसल एक निजी संस्थान की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में नाबालिग बच्चियों से रेप का खुलासा हुआ। बालिका गृह से 44 किशोरियों को 31 मई को मुक्त कराया गया. इन्हें पटना, मोकामा और मधुबनी के बालिका गृह में भेजा गया। जांच में 34 बच्चियों का यौन शोषण किए जाने की पुष्टि हुई।

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