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ई-कॉमर्स पर सरकार की सख्ती से वर्ष 2022 तक 46 बिलियन डॉलर की ऑनलाइन बिक्री हो सकती है प्रभावित: PwC

नई दिल्ली। ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए सरकार के नए विदेशी निवेश प्रतिबंध, जिसमें अमेजन डॉट कॉम इंक और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट भी शामिल है की बिक्री वर्ष 2022 तक 46 बिलियन डॉलर तक कम हो सकती है। वैश्विक सलाहकार PwC से एक मसौदा विश्लेषण के अनुसार यह जानकारी सामने आई है।इस परिवर्तन के मुताबिक देश की ई-कॉमर्स कंपनियां एक फरवरी से अपने प्लेटफॉर्म्स पर उन कंपनियों के प्रोडक्ट्स की बिक्री नहीं कर पाएंगी, जिन्होंने इन कंपनियों ने इक्विटी ले रखी है और वो उन पर अपने उत्पादों को एक्सक्लूसिवली बिक्री के लिए कंपनियों के प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर जोर डालती हैं।मई महीने में होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले दिसंबर महीने में की गई इस घोषणा को मोदी सरकार की ओर से छोटे कारोबारियों और दुकानदारों को खुश करने का तरीका माना जा रहा है। ये लोग एक मजबूत वोटर बेस बनाते हैं और इन्हें ग्लोबल ऑनलाइन रिटेलर्स से खतरा है।इंडस्ट्री के सूत्रों का मानना है कि यह पॉलिसी कंपनी की तमाम निवेश योजनाओं को लंबित या बेपटरी कर सकती है और ये नए एवं जटिल बिजनेस स्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को मजबूर कर सकती है।उद्योग के अनुमानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के उपयोग के मुताबिक पीडब्ल्यूसी की ओर से किए गए निजी विश्लेषण के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि अगर कंपनियों ने ई पॉलिसी के मुताबिक अपने बिजनेस मॉडल को बदला तो ऑनलाइन रिटेल सेल्स ग्रोथ, टैक्स कलेक्शन और रोजगार सृजन बुरी तरह से प्रभावित होगा।

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