सर्दियों में हार्टअटैक के 50 फीसदी मामले साइलेंट होते हैं।ठंड में सुबह सैर से बचें, कुछ समय धूप में बिताएं। इस मौसम में दिल का दौरे पड़ने पर हर बार सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, सांस फूलने और अचानक पसीना आने जैसी शिकायत नहीं होती। विशेषज्ञों के मुताबिक, साइलेंट हार्ट अटैक डायबिटिक पेशेंट्स को होने की आशंका ज्यादा होती है। जब भी ऐसा अटैक होता है तो हार्ट से जाने वाली नसें गल जाती हैं। इस कारण उन्हें दर्द का अहसास होता है। कई बार गैस या घबराहट के कारण भी यह होता है। ठंड में नसें सिकुड़ी रहती हैं और ब्लडप्रेशर भी हाई रहता है। कई लोग ठंड में पानी कम पीते हैं। इस कारण डिहाईड्रेशन होता है और नतीजा ब्लड गाढ़ा हो जाता है। धमनियों में ब्लॉकेज होने के कारण भी ऐसे अटैक ज्यादा होते हैं। हार्ट अटैक के मामलों मे 90 फीसदी डायबिटीक लोगों में होते हैं। इसलिए उन्हें नियमित जांच कराना चाहिए।
सामान्य लक्षणों के बगैर होने वाले हार्ट अटैक को ‘साइलेंट’ कहा जाता है। इसमें हृदय की मांसपेशी की तरफ बहने वाला रक्त प्रवाह काफी हद तक कम हो जाता है या फिर पूरी तरह से कट जाता है।हार्ट अटैक के जोखिम से घिरे अधिक उम्र के लोग साइलेंट हार्ट अटैक के झटके को अमूमन नहीं झेल पाते। यह हृदय पर इतना जबरदस्त दबाव बनाता है कि कई बार मरीज मदद के लिए पुकार भी नहीं पाता।साइलेंट हार्ट अटैक अक्सर न पहचाने जा सकने वाले लक्षणों, समुचित इलाज के अभाव या समय पर इलाज न मिलने की वजह से घातक हो सकता है।
हार्ट अटैक का पहला लक्षण सीने में जलन या फिर दर्द होना है, लेकिन साइलेंट हार्ट अटैक में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। जब किसी व्यक्ति को साइलेंट अटैक की प्रॉब्लम होती है तो उसे सीने में किसी प्रकार का दर्द नहीं होता। इस बीमारी में मरीज को पता ही नहीं चलता है कि क्या हो रहा है। इसलिए इसे पहचानना काफी मुश्किल होता है। बेहतर उपाय है कि ऐसी आदतें लाइफस्टाइल में शामिल की जाएं जो ऐसी स्थितियां बनने से रोकें।
हार्ट अटैक का पहला लक्षण सीने में जलन या फिर दर्द होना है, लेकिन साइलेंट हार्ट अटैक में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। जब किसी व्यक्ति को साइलेंट अटैक की प्रॉब्लम होती है तो उसे सीने में किसी प्रकार का दर्द नहीं होता। इस बीमारी में मरीज को पता ही नहीं चलता है कि क्या हो रहा है। इसलिए इसे पहचानना काफी मुश्किल होता है। बेहतर उपाय है कि ऐसी आदतें लाइफस्टाइल में शामिल की जाएं जो ऐसी स्थितियां बनने से रोकें। जैसे-
- सुबह ठंड में सैर करने से बचें क्योंकि ऐसा करने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जो हार्ट पर दबाव बढ़ाता है। सैर का समय बदलने से आपको न सिर्फ पर्याप्त धूप मिलेगी जो कि विटामिन डी का स्रोत होती है बल्कि शरीर को गर्मी भी मिलेगी।
- घर से बाहर जाते समय शरीर को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह से ढककर रखें। घर में या धूप में हल्के-फुल्के व्यायाम करना जारी रखें। साथ ही ब्लड प्रेशर भी जांचते रहें।
- भोजन और दवाएं समय से लेते रहें ताकि मौसम की मांग के मुताबिक शरीर ढलता रहे। इसी तरह, वायु प्रदूषण और अन्य कारणों की वजह से होने वाले संक्रमण से बचने का हर संभव प्रयास करें। अगर संक्रमण हो भी जाए तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें, जिससे मरीज को आराम मिल सके।
- साइलेंट हार्ट अटैक से बचने के लिए हृदय रोगियों को तला भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे पचाने के लिए शरीर को अधिक काम करना पड़ता है। ऐसा भोजन करें जो हृदय के लिए सेहतमंद हो और आपकी सेहत बेहतर बनाने में मददगार हो।
- हार्ट में ऑक्सीजन की अधिक मांग होने, शरीर का तापमान असामान्य ढंग से कम होने, छाती में संक्रमण पैदा करने वाले वायु प्रदूषकों आदि के चलते हार्ट अटैक के मामले बढ़ सकते हैंं। इसलिए वायु प्रदूषण से जितने बचें उतना ही बेहतर है। जिन शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर अधिक है वहां मास्क का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है।
- धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी है चाहें मोटे हों या दुबले। साइंस पत्रिका, यूरोपियन हार्ट जनरल में छपे एक शोध के अनुसार दुबले लोगों को भी हार्ट अटैक का खतरा होता है। शोध के अनुसार, जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 18.5 से कम होता है और वे धूम्रपान करते हैं, तो उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा अधिक होता है।