पंजाब

हाँग काँग कोर्ट द्वारा नाभा जेल ब्रेक के मुख्य साजिशकर्ता रोमी के प्रत्यर्पण हेतु भारत सरकार का अनुरोध मंजूर

चंडीगढ़ – पंजाब पुलिस और भारत सरकार के समन्वित प्रयासों के चलते हांगकांग की एक अदालत ने मंगलवार को नाभा जेल ब्रेक के प्रमुख साजिशकर्ता तथा अन्य प्रमुख अपराधों में शामिल, भगोड़े रमनजीत सिंह उर्फ रोमी के प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला सुनाया। नशे के कारोबार की एक बड़ी मछली माना जाता भगोड़ा रमनजीत सिंह उर्फ रोमी 27 नवंबर, 2016 को अत्यधिक सुरक्षित नाभा जेल ब्रेक जैसे कई सनसनीखेज जघन्य अपराधों के मामलों में वांछित था। उसे जून 2016 में पुलिस स्टेशन कोटवाली नाभा की एफआईआर 60/16 के तहत विभिन्न बैंकों के निष्क्रिय खातों के स्किम्ड डेटा के साथ-साथ हथियारों और फर्जी क्रेडिट कार्ड की बरामदगी के बाद गिरफ्तार किया गया था। उसे अगस्त 2016 में जमानत मिल गई थी और जिसके बाद वह जमानत आदेशों की शर्तों का उल्लंघन करने के बाद हांगकांग भाग गया।रोमी जोकि कुख्यात अपराधी रमनजीत उर्फ रामी मशाना जिसे कई हत्याओं के मामलों में दोषी करार दिया गया है, का चचेरा भाई है, और उसने अत्यधिक सुरक्षित जेल नाभा में कई अनुभवी अपराधियों और आतंकवादियों के साथ संबंध विकसित किए, जहां उसे उसकी गिरफ्तारी के बाद रखा गया था। रमनजीत सिंह उर्फ रोमी पुत्र बलबीर सिंह निवासी गांव बंगी रुल्दू, तलवंडी साबो, थाना रमन मंडी, जिला बठिंडा ने दो आतंकवादियों सहित छह कुख्यात अपराधियों की नाभा जेल से भागने में मदद करने की साजिश रची।27 नवंबर, 2016 को सोलह अपराधियों ने जेल पर हमला करके अंधाधुंध गोलियां चलाईं जिसके चलते हरजिंदर सिंह उर्फ विक्की गौंडर, नीटा देओल, गुरप्रीत सेखों, अमन धोतियां तथा मिंटू और कश्मीर सिंह गलवड्डी नाम के दो आतंकवादियों सहित छह मोस्ट वांटेड अपराधी भागने में सफल हो गए थे।इसके बाद तुरंत एक विस्तृत जांच शुरू की गई थी, जिस पर पंजाब के वर्तमान डीजीपी दिनकर गुप्ता, जो उस समय डीजीपी इंटेलिजेंस थे, द्वारा कड़ी निगरानी रखी गई थी।जांच के दौरान, विभिन्न सुनियोजित अभियानों में 32 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इन अभियानों का सफलतापूर्वक संचालन एआईजी काउंटर इंटेलिजेंस गुरमीत सिंह चौहान, तत्कालीन एसपी इन्वेस्टीगेशन पटियाला और अब एसपी सिटी मोहाली हरविंदर विर्क और तत्कालीन सीआईए प्रभारी पटियाला और अब डीएसपी बिक्रमजीत बराड़ की एक टीम ने किया था।एक प्रवक्ता ने बताया कि रमनजीत उर्फ रोमी के खि़लाफ़ हवालगी की कार्यवाही साल 2018 में शुरू की गई जब उसे हाँगकाँग में गिरफ्तार किया गया था। जून, 2018 में केस की पैरवी करने के लिए ए.आई.जी. काउन्टर इंटेलिजेंस गुरमीत सिंह चौहान, हरविन्दर सिंह विर्क और जि़ला अटार्नी संजीव गुप्ता पर आधारित टीम हाँगकाँग गई और कोतवाली नाभा में दर्ज अलग-अलग मामलों में भगौड़े की अस्थायी गिरफ्तारी सुरक्षित बनाई। हरविन्दर सिंह विर्क ने हाँगकाँग और भारत की कानूनी ज़रूरतों के मुताबिक इस सम्बन्ध में मज़बूत केस तैयार किया और इस केस के सम्बन्ध में उन्होंने निजी तौर पर कई बार हाँगकाँग के न्याय विभाग का दौरा किया। इस पुलिस अधिकारी ने रोमी की तरफ से पुलिस हिरासत के दौरान बिक्रमजीत बराड़ और सी.आई.ए. की टीम की तरफ से अत्याचार और यातनाओं के लगाए झूठे दोषों का खंडन करने में सफलता हासिल की। पंजाब पुलिस की तरफ से और सबूत भी एकत्रित किये गए। यह जि़क्रयोग्य है कि पंजाब पुलिस ने कई अपराधिक मामलों में ज़रुरी और भगौड़े हो चुके रोमी के सम्बन्ध में, भारत सरकार और हांग कांग की सरकार के बीच 28 जून, 1997 को हाँगकाँग में हस्ताक्षर की गई द्विपक्षीय हवालगी संधि के आर्टीकल 10 के अंतर्गत अस्थायी गिरफ्तारी के लिए औपचारिक विनती की थी। इस विनती में रोमी की भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए और डाके, कत्ल, उगाही, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य नशीले पदार्थों की स्मगलिंग जैसे जुर्मों के साथ साथ स्थानीय लोगों की सहायता से कट्टर अपराधियों को हथियारों की स्पलाई करने के दोष में शामिल होने का हवाला दिया गया था।रोमी की हवालगी अति अपेक्षित होने का जि़क्र करते हुए पंजाब पुलिस ने बताया कि जांच और मिंटू समेत ग्रिफतार व्यक्तियों की पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मुख्य साजि़शकर्ता रोमी था जिसने अति सुरक्षित नाभा ज़ेल पर हमले के लिए तालमेल कायम किया और जेल तोडऩे के बाद भागने वाले अपराधियों को वित्तीय और अन्य सहायता मुहैया करवाई। राज्य की पुलिस ने यह भी बताया कि रोमी अभी भी भगौड़ा है और हाँगकाँग में रह रहा है और कई अपराधिक गतिविधियों में शामिल है जिस करण वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है और उसे तत्काल तौर पर गिरफ्तार करने की ज़रूरत है।

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