80 गाँवों के 2200 मनरेगा श्रमिकों ने डाला योगदान
चंडीगढ़ – बाढ़ों के प्रकोप का सामना कर रहे गाँव जानिया चाहल में सतलुज नदी में पड़ी 500 फुट चौड़ी दरार को भरने का कार्य सोमवार प्रात:काल मुकम्मल करके एक बड़ी सफलता हासिल की गई। भारतीय सेना के इंजीनियरों की देखरेख अधीन ड्रेनेज विभाग के ठोस यत्नों से यह कार्य संभव हो सका है। पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि 80 गाँवों के 2200 मनरेगा श्रमिकों, कुशल कर्मचारियों, पंचायतों, संत बलबीर सिंह सीचेवाल समेत सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के वलंटियरों और अन्यों ने इस कार्य में अपना योगदान डाला।जानिया चाहल की दरार को भरने के लिए रेत के बोरों और पत्थरों का बाँध बनाने का कार्य मुकम्मल हो गया है। इस दरार को भरने के लिए 3 लाख मिट्टी की बोरियों, 2 लाख घन फुट बड़े पत्थर और 270 क्विंटल स्टील की तार का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा यह बड़े पत्थर पठानकोट से मंगवाए गए। यह पत्थर कमालपुर मंडी में इक किये गए जहाँ से इनकी सप्लाई ट्रैक्टर ट्रालियों के द्वारा बाँध तक की गई।अब, मिट्टी के साथ इस बाँध को और मज़बूती देने का कार्य शुरू हो गया है। इस कार्य के लिए भारी अर्थमूवर मशीनरी का प्रयोग किया जा रहा है और आने वाले तीन-चार दिनों में यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।