राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने स्टार एथलीट हिमा दास को बीते एक माह में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पांच स्वर्ण पदक जीतने पर दी बधाई। दोनों ने आगामी ओलिंपिंक में हिमा के गौरवपूर्ण प्रदर्शन की उम्मीद जताई।भारत की युवा एथलीट हिमा दास ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। भारत की नई उड़न परी हिमा दास ने शनिवार को एक और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। हिमा ने चेक गणराज्य में नोवे मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। इसके साथ ही हिमा ने एक महीने के भीतर ही पांचवां गोल्ड मेडल जीत लिया है। भारतीय खेल जगत में इन दिनो भारत में एक नाम काफी चर्चा में आ गया है। पिछले एक महिने में ट्रैक एंड फील्ड में उनकी स्वर्णिम कामयाबी ने पूरे देश को एक नई उम्मीद जगा दी है। ये नाम है देश की युवा एथलीट हिमा दास का। आईसीसी विश्व कप के सेमीफाइनल में मिली हार से निराश भारतीय खेल प्रेमियों के लिए हिमा दास की सफलता नए किर्तमान रच रही है। असम की 19 वर्षीय एथलीट हिमा दास का नाम गूगल में इन दिनो सोशल मीडिया पर काफी ऊपर ट्रेंड कर रहा है। भारत की नई उड़न परी हिमा दास ने शनिवार को एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हिमा ने चेकगणराज्य में नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। उन्होने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक फोटो साझा कर इस बात की जानकारी दी।हिमा ने 52.09 सेकेंड का समय निकाला। ये इस महीने उनका कुल पांचवां स्वर्ण पदक है। इससे पहले वह दो जुलाई को यूरोप में, सात जुलाई को कुंटो एथलेटिक्स मीट में, 13 जुलाई को चेक गणराज्य में ही और 17 जुलाई को टाबोर ग्रां प्री में अलग-अलग स्पधार्ओं में स्वर्ण जीत चुकी हैं। हिमा की इस सफलता के पीछे उनकी लगन, कड़ी मेहनत और हिम्मत का हाथ है। हिमा असम में धान की खेती करने वाले एक साधारण किसान की बेटी हैं। हिमा के कोच निपोन की मानें तो उन्होंने कुछ साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था। इससे पहले वह लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं और मैदान पर अपनी फुर्ती, दमखम और स्किल से उनको छका देती थीं। हिमा के कोच निपोन ने उन्हें पहली बार फुटबॉल मैदान पर लड़कों को छकाते हुए ही देखा था। इसके बाद वह हिमा के परिवार वालों से मिले और उनसे अपनी बेटी को एथलेटिक्स में भेजने के लिए कहा। हिमा का परिवार उनकी कोचिंग का खर्चा उठाने में असमर्थ था, तो करियर के शुरुआत में उनके कोच ने उनकी काफी मदद की। एथलेटिक्स में आने के बाद हिमा दास को सबसे पहले अपना परिवार छोड़कर करीब 140 किलोमीटर दूर आकर बसना पड़ा। फिर शुरू हुआ हिमा की कामयाबी का सफर। पिछले साल उन्होने आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर स्प्रिंट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत कर सभी को चौंका दिया। यह स्वर्ण पद इसलिए खास था क्योंकि भारत के एथलेटिक्स इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी खिलाड़ी ने आईएएएफ की ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया हो। इसके बाद 2018 के अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा दास ने 51.32 सेकेंड में दौर पूरी करते हुए छठवाँ स्थान प्राप्त किया था। जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। महिलाओ की 400 मीटर रेस में उन्होने रजत पदक जीतने में कामयाबी पाई। वही महिलाओ की 4X400 मीटर में वो स्वर्ण जीतने वाली टीम का हिस्सा रही।