रेपो रेट में लगातार दो बार कटौती करने के बाद उपभोक्ताओं को सस्ता कर्ज दिलाने के लिए आरबीआई बैंकों में और नकदी तरलता बढ़ाने की तैयारी में है।
डॉलर-रुपया
विनिमय और बांड के जरिये बैंकों में 50 हजार करोड़ की अतिरिक्त पूंजी
बढ़ाई जा सकती है। अगले दो महीने में सिस्टम में तरलता बढ़ाने पर जोर दिया
जाएगा, ताकि ब्याज दरों को नीचे लाया जा सके। रेपो रेट में दो बार कटौती के
बावजूद वाणिज्यिक बैंकों की ओर से ग्राहकों तक इसका लाभ नहीं पहुंचाया
गया।
RBI की कोशिश है कि बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में नकदी उपलब्ध
कराई जाए, ताकि वे कर्ज की लागत कम कर सकें और उपभोक्ताओं को इसका लाभ
मिले।अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बाजार में पर्याप्त नकदी बढ़ाना
जरूरी है। लिहाजा नकदी की समीक्षा कर बाजार की जरूरतों के हिसाब से प्रवाह
बढ़ाया जाएगा।