पंजाब

पीआरएसआई ने मनाया 34वां राष्ट्रीय पीआर दिवस

‘‘संतुलित और सकारात्मक मीडिया कवरेज समय की ज़रूरत’’, विशेषज्ञों की राय
चंडीगढ़ – पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (पीआरएसआई), चंडीगढ़ चैप्टर ने पीआरएसआई चंडीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल के निर्देशन में आज प्रेस क्लब चंडीगढ़ में 34वां ‘राष्ट्रीय पीआर दिवस’ मनाया गया जिस दौरान ‘आम चुनाव में पीआर की भूमिका’ पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया।अपने उद्घाटनी भाषण में, पीआरएसआई चंडीगढ़ चैप्टर के महासचिव डॉ. जिम्मी कंासल ने पीआर दिवस के महत्व को प्रस्तुत करते हुए कहा कि देशभर में लोकसंपर्क और संचार पेशेवर हर साल 21 अप्रैल को राष्ट्रीय पीआर दिवस के रूप में मनाते हैं ताकि राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर जनता की राय बनाई जा सके।उन्होंने कहा कि 21 अप्रैल 1968 को पीआर पेशेवरों के लिए नैतिक आचार संहिता को अपनाया गया था, जो वास्तव में भारत में व्यावसायिक लोकसंपर्क की शुरुआत थी। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय पीआर दिवस 21 अप्रैल, 1986 को घोषित किया गया था और अपने पेशे में व्यावसायिकता के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हमने अपने आप को लोक संपर्क के कल्याण हेतु पुन: समर्पित कर दिया’’।इस सेमिनार के दौरान मौजूदा मुद्दे पर विचार करने वाले प्रख्यात वक्ताओं में विवेक अत्रे, पूर्व आईएएस अधिकारी, अजय शुक्ला एडिटर-इन-चीफ आईटीवी नेटवर्क, पीके खुराना संस्थापक अध्यक्ष क्विक रिलेशंस प्राइवेट लिमिटेड, आरके कपलाश वाईस चेयरमैन पीआरएसआई चंडीगढ़ और डॉ. अमनप्रीत रंधावा, हैड, सेंटर ऑफ़ एडवांस्ड मीडिया स्टडीज़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला शामिल थे। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है। लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया में मतदाता की भागीदारी किसी भी लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए एक अभिन्न अंग है।पैनल चर्चा में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि किस प्रकार से नागरिक चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर और मतदान के अधिकार का प्रयोग करके अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकते हैं।विवेक अत्रे ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि पीआर एक निरंतर विकसित होने वाला पेशा है। तकनीकी प्रगति और आईटी ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। भारतीय चुनाव दुनिया में होने वाले सबसे बड़े चुनाव हैं और इसमें मीडिया की भूमिका सर्वोपरि हो गई है व इसलिए संतुलित और सकारात्मक कवरेज की आवश्यकता है।डॉ. रंधावा ने पीआर पेशेवरों और शिक्षकों के बीच के अंतर को समाप्त करने पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने संकटकालीन संचार और छवि पुनर्निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की।इस अवसर पर अजय शुक्ला ने चुनाव में सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की भूमिका पर बात की। उन्होंने जन-जन तक पहुँचने के लिए एक साधन के रूप में संचार के प्रभावी तरीके पर भी जोर दिया।सेमीनार का समापन पीआरएसआई चंडीगढ़ चैप्टर के कोषाध्यक्ष हरजिंदर कुमार के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ जिस दौरान उन्होंने कहा कि पीआरएसआई उत्कृष्टता में विश्वास करता है जो एक निरंतर सफर है, न कि कोई मंजिल।इस अवसर पर उपस्थित अन्य लोगों में पीआरएसआई उत्तर क्षेत्र के पूर्व उपाध्यक्ष वीपी शर्मा, राज सिंह कादियां उप निदेशक पीआर हरियाणा, डॉ आशुतोष मिश्रा, हैड जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग, चितकारा विश्वविद्यालय, पटियाला, डॉ बिंदु सिंह, जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शामिल थे।

‘‘संतुलित और सकारात्मक मीडिया कवरेज समय की ज़रूरत’’, विशेषज्ञों की राय
चंडीगढ़ – पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (पीआरएसआई), चंडीगढ़ चैप्टर ने पीआरएसआई चंडीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल के निर्देशन में आज प्रेस क्लब चंडीगढ़ में 34वां ‘राष्ट्रीय पीआर दिवस’ मनाया गया जिस दौरान ‘आम चुनाव में पीआर की भूमिका’ पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया।अपने उद्घाटनी भाषण में, पीआरएसआई चंडीगढ़ चैप्टर के महासचिव डॉ. जिम्मी कंासल ने पीआर दिवस के महत्व को प्रस्तुत करते हुए कहा कि देशभर में लोकसंपर्क और संचार पेशेवर हर साल 21 अप्रैल को राष्ट्रीय पीआर दिवस के रूप में मनाते हैं ताकि राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर जनता की राय बनाई जा सके।उन्होंने कहा कि 21 अप्रैल 1968 को पीआर पेशेवरों के लिए नैतिक आचार संहिता को अपनाया गया था, जो वास्तव में भारत में व्यावसायिक लोकसंपर्क की शुरुआत थी। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय पीआर दिवस 21 अप्रैल, 1986 को घोषित किया गया था और अपने पेशे में व्यावसायिकता के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हमने अपने आप को लोक संपर्क के कल्याण हेतु पुन: समर्पित कर दिया’’।इस सेमिनार के दौरान मौजूदा मुद्दे पर विचार करने वाले प्रख्यात वक्ताओं में विवेक अत्रे, पूर्व आईएएस अधिकारी, अजय शुक्ला एडिटर-इन-चीफ आईटीवी नेटवर्क, पीके खुराना संस्थापक अध्यक्ष क्विक रिलेशंस प्राइवेट लिमिटेड, आरके कपलाश वाईस चेयरमैन पीआरएसआई चंडीगढ़ और डॉ. अमनप्रीत रंधावा, हैड, सेंटर ऑफ़ एडवांस्ड मीडिया स्टडीज़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला शामिल थे। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है। लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया में मतदाता की भागीदारी किसी भी लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए एक अभिन्न अंग है।पैनल चर्चा में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि किस प्रकार से नागरिक चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर और मतदान के अधिकार का प्रयोग करके अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकते हैं।विवेक अत्रे ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि पीआर एक निरंतर विकसित होने वाला पेशा है। तकनीकी प्रगति और आईटी ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। भारतीय चुनाव दुनिया में होने वाले सबसे बड़े चुनाव हैं और इसमें मीडिया की भूमिका सर्वोपरि हो गई है व इसलिए संतुलित और सकारात्मक कवरेज की आवश्यकता है।डॉ. रंधावा ने पीआर पेशेवरों और शिक्षकों के बीच के अंतर को समाप्त करने पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने संकटकालीन संचार और छवि पुनर्निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की।इस अवसर पर अजय शुक्ला ने चुनाव में सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की भूमिका पर बात की। उन्होंने जन-जन तक पहुँचने के लिए एक साधन के रूप में संचार के प्रभावी तरीके पर भी जोर दिया।सेमीनार का समापन पीआरएसआई चंडीगढ़ चैप्टर के कोषाध्यक्ष हरजिंदर कुमार के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ जिस दौरान उन्होंने कहा कि पीआरएसआई उत्कृष्टता में विश्वास करता है जो एक निरंतर सफर है, न कि कोई मंजिल।इस अवसर पर उपस्थित अन्य लोगों में पीआरएसआई उत्तर क्षेत्र के पूर्व उपाध्यक्ष वीपी शर्मा, राज सिंह कादियां उप निदेशक पीआर हरियाणा, डॉ आशुतोष मिश्रा, हैड जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग, चितकारा विश्वविद्यालय, पटियाला, डॉ बिंदु सिंह, जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शामिल थे।

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