सभी के लिए अब यह सीख है कि अगर उच्चतम पायदान के लोग मर्जी या बिना मर्जी के कर चुकाते है तो गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को प्रगति का फायदा मिल सकता है। सेक्शन 87बी के तहत कर रियायत में भारी वृद्धि होने से करीब तीन करोड़ ऐसे लोगों को फायदा मिलेगा जो आयकर छूट सीमा से थोड़ा ऊपर हैं। प्रभावी तौर पर हर महीने 60,000-65000 रुपये तक वेतन पाने वालों पर शायद ही कर का कोई बोझ पड़ेगा।आश्चर्यजनक रूप से कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बजट भाषण में ही टैक्स-प्लानिंग की कुछ टिप्स भी दे डालीं। यह थोड़ा अजीब लगता है लेकिन चार्टर्ड एकाउंटेंट की परीक्षा में अखिल भारतीय रैंक पाने वाले गोयल मुझे लगता है कि कम टैक्स भरने के बारे में सलाह देने की अपनी आदत से बच नहीं पाए। निश्चित ही यह सुखद बदलाव है। अभी तक कई वित्त मंत्री पेशे से अधिवक्ता रहे हैं जो आदत से थोड़े कड़क मिजाज होते हैं।जैसा खुद गोयल ने कहा कि आप अपनी पीएफ कटौती, बीमा और सेक्शन 80सी के अन्य निवेशों को जोड़ लें तो कर छूट सीमा 6.5 लाख रुपये तक चली जाएगी। अगर आप थोड़ी और बचत कर सकते हैं तो सात लाख रुपये तक आय होने पर आपको टैक्स नहीं देना होगा। इन सबके बाद भी (यह वित्त मंत्री ने सलाह नहीं दी है), निजी क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन का पुनर्गठन कर सकती हैं। इससे कुछ और ज्यादा आय होने पर भी कर अदायगी से बचा जा सकता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि निचले और मध्यम वर्ग में ज्यादातर करदाताओं को कोई भी टैक्स भरने से राहत मिल गई है।