जीवन शैली

जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार, 2019-20 में एक हज़ार लडक़ों के पीछे लड़कियों की दर 920 हुई-अरुणा चौधरी

चंडीगढ़ – सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों की पीठ थपथपाते हुए कैबिनेट मंत्री श्रीमती अरुणा चौधरी ने आज कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ मुहिम के अंतर्गत साझे यत्नों के स्वरूप जन्म के समय लिंग अनुपात (एस.आर.बी.) में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है।श्रीमती चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के एचएमआईएस के आंकड़ों के अनुसार जन्म के समय लिंग अनुपात में 19 अंक का सुधार दर्ज किया गया है, जो साल 2018-19 में एक हज़ार लडक़ों के पीछे 901 लड़कियों से सुधर कर साल 2019-20 में एक हज़ार लडक़ों की तुलना में 920 लड़कियाँ हो गया। यह वृद्धि साल 2013-14 से देखा गया। वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान जन्म के समय लिंग अनुपात एक हज़ार लडक़ों के पीछे 890 लड़कियाँ था, जो वित्तीय वर्ष 2018-19 में सुधर कर 901 लड़कियाँ हो गया था।कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत राज्य भर में विभिन्न गतिविधियां करवाई गईं, जिनका उद्देश्य राज्य में लिंग अनुपात में सुधार लाना है। इन गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस मनाना, रोड शो, आऊटरीच अधीन मैराथन और रैलियाँ, बाल पेंटिंग्ज़, कंबल बाँटने के साथ-साथ लडक़ी के जन्म के समय लोहड़ी का विशेष जश्न और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाना शामिल है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने 13 जनवरी, 2019 से 7 जनवरी, 2021 के दरमियान जन्मी लड़कियों को लोहड़ी के त्योहार पर सम्मानित किया और लड़कियों के जन्म सम्बन्धी जश्नों के लिए राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर समागम भी करवाए जाएंगे।श्रीमती चौधरी ने बताया कि इलाके के लिंग अनुपात को दिखाने के लिए पैंफलैटों की बाँट, मोबाइल प्रदर्शनी वैनें चलाने और गुड्डा-गुड्डी बोर्ड लगाने के रूप में गाँव, ब्लॉक और जि़ला स्तर पर व्यापक मीडिया मुहिमें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा, कोविड-19 के दौरान जिलों में व्यापक तौर पर मास्कों के साथ-साथ सैनेटरी पैड भी बाँटे गए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जिलों में मास्कों के साथ-साथ बड़े स्तर पर सैनेटरी नैपकिनों की बाँट की गई।उन्होंने बताया कि विभाग के मैसकट ‘सुखी भैनजी’ (मददगार आंगनवाड़ी वर्कर) के द्वारा अच्छे पोषण, देख-रेख, बाल सुरक्षा और बीमारी की रोकथाम संबंधी जागरूक करने के लिए बाकायदा आधार पर ऑनलाइन संदेश जारी किये जाते हैं।

 

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