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‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है देश : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोच्चि-मैंगलुरू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को राष्ट्र को समर्पित किया। कहा, ऊर्जा को लेकर सरकार की नीति समावेशी है और देश ‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोच्चि-मैंगलुरू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को राष्ट्र को समर्पित किया। यह योजना ‘एक राष्ट्र, एक गैस ग्रिड’ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। लगभग 450 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन का निर्माण गेल (इंडिया) लिमिटेड ने किया है और इसकी परिवहन क्षमता 12 मिलियन मीट्रिक मानक क्यूबिक मीटर प्रति दिन है।यह केरल के कोच्चि स्थित एलएनजी के पुनर्गैसीकरण टर्मिनल से गैस ले जाएगी। एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझीकोड, कन्नूर और कासरगोड जिले होते हुए मंगलुरु तक प्राकृतिक गैस ले जाएगी। परियोजना की कुल लागत लगभग 3000 करोड़ रूपये है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा को लेकर हमारी नीति समावेशी है और देश ‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की भागीदारी छह से बढ़ाकर 15 फ़ीसदी करने के लक्ष्य पर सरकार काम कर रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने इस पाइपलाइन से होने वाले दस फायदों को भी गिनाया। पीएम मोदी ने कहा कि इस परियोजना के निर्माण के दौरान भी लोगों को रोज़गार मिला और परियोजना का शुभारंभ होने के बाद भी लोगों को रोज़गार के कई अवसर मुहैया होंगे।कोरोना काल में लोगों को 12 करोड़ मुफ्त सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कोची मंगलुरू पाइप लाइन से 21 लाख और घरों में पाइप से गैस कनेक्शन पहुंचेगा। साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का युवा भारत, दुनिया पर छा जाने के लिए इंतजार नहीं कर सकता इसलिए देश ने स्पीड और स्केल के साथ स्कोप भी बढ़ाया है। पीएम ने कहा कि आज देश में बायोफ्यूल्स पर भी बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। एथेनॉल के निर्माण पर गंभीरता से काम हो रहा है । अगले 10 साल में पेट्रोल में होने वाली एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% तक करने का लक्ष्य है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा महत्व दिया जा रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में समुद्र आधारित नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

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