पंजाब

खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा जितनी अहम – मनप्रीत सिंह बादल

चंडीगढ़ – ख़ाद्य सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कृषि में जैविक विभिन्नता होनी चाहिए। इन विचारों का प्रगटावा पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने आज यहाँ चौथे मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के आखिरी दिन जय जवान जय किसान -जवानों की जीत किसानों की जीत विषय पर हुए आनलाइन सैशन में हिस्सा लेने के अवसर पर किया।खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में देश की ज़रूरत के समय पंजाब हमेशा अग्रणी रहा है। इसलिए पंजाब देश की खडग भुजा और अन्न भंडार के तौर पर जाना जाता है। सैशन के संचालक और संसद मैंबर श्री मनीष को कृषि राज्यों पर खेती कानूनों के प्रभावों संबंधी पूछे गए सवाल का जवाब देते हुये स. बादल ने कहा कि राज्य की आबादी राष्ट्रीय आबादी का 2प्रतिशत होने के बावजूद पंजाब ने राष्ट्रीय अनाज सुरक्षा और देश की सरहदों की सुरक्षा में बड़ा योगदान डाला है। वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए पंजाब ने अपनी मिट्टी को ज़हरीला बना लिया और पंजाब में भूजल का स्तर भी काफ़ी नीचे चला गया। इसके इलावा भारत माता के सम्मान में पंजाब ने अपने कई बहादुर जवानों ने बलिदान दे दिया और बदले में कुछ नहीं माँगा, परन्तु अब जब भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश खासकर पंजाब के लोगों की आवाज़ सुननी चाहिए। स. बादल ने कहा कि हालाँकि हमारे देश में खाद्य सुरक्षा के बड़े भंडार हैं, परन्तु अधिकतर जनसंख्या इसको खरीदने के समर्थ नहीं है। हंगर इंडैक्स के अनुसार, भारत 94 वें स्थान पर है, जबकि इथोपिया जैसे देशों ने भारत की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि केंद्र सरकार लोगों को भोजन नहीं दे सकती तो इसको सरकार कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। आज, भारतीय फ़ौज में पंजाब का योगदान 8 प्रतिशत है जो बिर्टिश काल के दौरान 20 प्रतिशत था।वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को इन कानूनों को रद्द करके फिर से विचारना चाहिए और केंद्र सरकार को इसको अपनी आत्म सम्मान का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने हरियाणे के लोगों का पंजाब के विरोध प्रदर्शन में सहयोग के लिए धन्यवाद भी किया। श्री मनीष तिवारी ने कहा कि इन विवादपूर्ण कानूनों के बारे विचार-विमर्श के लिए सभी धड़ों की एक कमेटी बनाई जानी चाहिए। केंद्र सरकार को यह कानून किसानों पर थोपने नहीं चाहिए।अदाकारा और राजनीतिज्ञ श्रीमती गुल पनाग ने कहा कि भारत के प्रसंग में ‘जय जवान, जय किसान ’ का नारा देश के विकास और रक्षा में किसानों और सैनिकों के योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा ने खाद्य सुरक्षा में भारत को ‘आत्म-निर्भर ’ बनाया है। उन्होंने कहा कि बहुत से फ़ौजी परिवारों का पृष्टभूमि किसानी है और उनमें से बहुत से इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं, क्या यह उनको ’देशध्रोही ’ बना देगा? श्रीमती पनाग ने सत्ताधारी पक्ष की तरफ से किसानों को देशद्रोही कहने पर भी गंभीर चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर कोई अपने विचार प्रकट करने के लिए स्वतंत्र है परन्तु हर विरोध प्रदर्शन करने वालों को देशद्रोही कहना सरकार की आदत बन गई है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

19 + 11 =

Most Popular

To Top