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पंजाब में पिछले 1 वर्ष के दौरान नशा करने वालों की गिनती में आई बड़ी कमी

स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने राज्य को नशा मुक्त करने का लिया प्रण
चंडीगढ़ – ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के अंतर्गत 938 फर्मों से तकरीबन 4 करोड़ रुपए की नशीले दवाओं की बरामदगी के साथ पंजाब में पिछले 1 वर्ष के दौरान नशा करने वालों की गिनती में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि यह नशीले दवाएं क्रमवार ढंग से नष्ट की जाएंगी जिसकी शुरुआत आज से की जा रही है और इस कार्यवाही से पंजाब को नशा मुक्त बनाने के मिशन को अर्थपूर्ण निष्कर्ष पर ले जाने में मदद मिलेगी। यहां चंडीगढ़ में 13 नये भर्ती हुये विश्लेषकों को नियुक्ति पत्र सौंपने के बाद बात करते हुये मंत्री ने कहा कि पंजाब नशा मुक्ति की राह पर है और आज सरकारी फूड एंड ड्रग लैबोरेटरियों में 9 विश्लेषकों की फूड लैब और 4 विश्लेषकों की ड्रग लैब में नियुक्ति की गई है। उन्होंने आगे बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई गई मुहिम के अंतर्गत बरामद की गई नशीली दवाओं में 5,42,425 गोलियाँ, 57,340 कैप्सूल, 4,654 टीके और 1,190 सिरप ज़ब्त किये गए हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनस्ट्रेशन द्वारा पंजाब के निवासियों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएँ मुहैया करवाने और राज्य में से नशों की लानत को जड़ से उखाडऩे के लिए अथक यत्न किये जा रहे हैं। इस मुहिम के अंतर्गत विभाग द्वारा ड्रग्गज़ एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 एंड रूल्ज 1945 के उल्लंघन के लिए फर्मों से बड़ी मात्रा में दवाएँ बरामद की गई हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार की राज्य में से नशों की कुरीति को जड़ से उखाडऩे की वचनबद्धता का जि़क्र करते स. बलबीर सिंह सिद्धू बताया कि स्टेट एफ.डी.ए. द्वारा राज्य में 8 प्रकार की दवाओं की बिक्री पर पहले ही रोक लगाई गई है। इन नशीले दवाओं में डाईफीनौकरीलेट, डैकस्टरोप्रोपौकसीफीन, कोडीन और इनके साल्ट, बुपरीनौरफिन, पैंटाजोसाईन, निटराजिपम और इसके साल्ट और ट्रामाडोल और टपैंटाडोल को लगभग 90 प्रतिशत लाइसेंस धारक कैमिस्टों को इसका स्टाक रखने और बेचने की मनाही है। केवल अस्पतालों के अंदर और बाहर की कुछ दुकानों को इन दवाओं की बिक्री करने की मंज़ूरी है। उन्होंने कहा कि उल्लंघन करने वाले कैमिस्टों के विरुद्ध कार्यवाही करते बड़ी संख्या में ड्रग लाइसेंस मुअत्तल/रद्द किये गए हैं। विभाग ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में दवाओं की दुकानों की गिनती पर काबू रखने के लिए ड्रग पॉलिसी में संशोधन भी किया है। इस अवसर परबोलते हुये श्री काहन सिंह पन्नू कमिशनर फूड एंड ड्रग ऐडमिनस्ट्रेशन ने कहा कि आदत डालने वाली दवाओं की खरीद, बिक्री और वितरण पर सख्ती से निगरानी को यकीनी बनाने के लिए विभाग द्वारा हिदायतें नियमित की गई हैं जिसके अंतर्गत किसी भी उत्पादक या व्यापारी की तरफ से प्रामाणिक ऑर्डर के बिना खरीददार को दवा सप्लाई करने की मनाही की गई है और इस तरह की किसी भी सप्लाई के लिए प्रमाणित स्रोत जैसे कि चैक, ड्राफ्ट या आर.टी.जी.एस. के द्वारा ही भुगतान करना लाजि़मी किया गया है। किसी भी ग़ैर प्रमाणित स्रोतों द्वारा की गई अदायगी को सीधे तौर पर ड्रग्गज़ एंड कॉस्मेटिक एक्ट और रूल्ज का उल्लंघन समझा जायेगा। जिसके अधीन लाइसेंस को मुअत्तल या रद्द किया जा सकता है। गौरतलब है कि नशों के विरुद्ध छेड़ी गई जंग के अंतर्गत राज्य सरकार की तरफ से खरड़ में एक अत्याधुनिक फूड और ड्रग टेस्टिंग लैब स्थापित की गई है जो आधुनिक सहूलतें और पेशेवर स्टाफ से लैस है।

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