पंजाब

उच्च शिक्षा मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजावा द्वारा गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी को ‘स्वच्छ कैंपस’ अवॉर्ड जीतने पर बधाई

देश भर के बड़े कैंपस वाली मल्टीस्पैशलिटी सरकारी यूनिवर्सिटियों में जी.एन.डी.यू सबसे साफ़-सुथरी

चंडीगढ़ – उच्च शिक्षा मंत्री श्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी को स्वच्छ कैंपस रैंकिंग -2019 के अंतर्गत मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एम.एच.आर.डी) द्वारा करवाए गए राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों के आधार पर बड़े कैंपसों वाले देश भर की मल्टीस्पैशलिटी सरकारी यूनिवर्सिटियों में प्रतिष्ठित स्थान हासिल करने के लिए बधाई दी है।आज यहाँ पंजाब सरकार के सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि देश में 400 से अधिक पब्लिक यूनीवर्सिटियां हैं और बड़े कैंपसों वाले मल्टीस्पैशलिटी पब्लिक यूनिवर्सिटियों में से जी.एन.डी.यू कैंपस सबसे अधिक ‘स्वच्छ कैंपस’ का गर्व हासिल करके अव्वल रही है।प्रवक्ता ने कहा कि कुल मिलाकर समूचे देश की सभी सरकारी यूनीवर्सिटियां (बड़े और छोटे कैंपस वाले) ओवरऑल मुकाबले में से जी.एन.डी.यू दूसरे नंबर पर है। पिछले साल भी इस यूनिवर्सिटी को सरकारी यूनिवर्सिटियों की श्रेणी में देश की सबसे अधिक साफ़ सुथरी उच्च शैक्षिक संस्थाओं में से दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। 500 एकड़ में फैली जी.एन.डी.यू के कैंपस में 12000 के करीब विद्यार्थी हैं और 1000 से भी कम विद्यार्थी वाली संस्थाओं के मुकाबले इतने विद्यार्थियों की स्वच्छता बनाए रखना बड़ा मुश्किल काम है परन्तु इसके बावजूद भी जी.एन.डी.यू सरकारी यूनिवर्सिटियों में दूसरा स्थान प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस साल इस स्वच्छता मुकाबलो में 6900 उच्च शिक्षा संस्थाओं ने हिस्सा लिया था।
मंगलवार को नयी दिल्ली में एक पुरस्कार समारोह के दौरान जी.एन.डी.यू के उप-कुलपति प्रोफ़ैसर (डा.) जसपाल सिंह संधू ने एम.एच.आर.डी केंद्रीय मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशाक से पुरस्कार प्राप्त किया।मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शैक्षिक संस्थाओं को उच्च शिक्षा संस्थाओं की स्वच्छता संबंधी दर्जाबन्दी में भाग लेने के लिए न्योता दिया था जहाँ कैंपस में साफ़-सुथरे और स्वच्छ वातावरण के आधार पर यह निर्णय लिया गया। इस साल स्वच्छता के मापदंडों को कुछ अतिरिक्त विशेषताएं शामिल करने के लिए सुधारा गया था, जो एक गतिशील वातावरण में ज़रूरी हैं। जिनमें शोचालयों की पूरी तरह देखभाल करना, कूड़े-कर्कट की सफ़ाई, होस्टल किचन की सफ़ाई, पानी की शुद्धता, भंडारण, बाँट सुविधा, हरियाली और बारिश के पानी व सोलर प्रणालियों का सही प्रयोग तथा गाँवों और नेबरहुड को इनकी साफ-सफाई के लिए अपनाना आदि शामिल थे। यूनिवर्सिटी द्वारा ऑफ -कैंपस में सफ़ाई रखने के लिए विशेष ध्यान देखने को मिला।सरकार की स्वच्छता मुहिम के हिस्से के तौर पर उच्च शिक्षा संस्थाओं की स्वच्छता दर्जाबन्दी एक महत्वपूर्ण सालाना अभ्यास है। दर्जाबन्दी का उद्देश्य संस्थाओं के दरमियान मुकाबले पैदा करने और उनको सर्वोत्त्म पुरस्कार देकर और ज्य़ादा स्वच्छ बनाना और वातावरण के प्रति और जि़म्मेदार बनाना है।एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने वाहन मुक्त कैंपस, बारिश के पानी का प्रयोग, भूजल की चार्जिंग, गंदे पानी का शोधन, ठोस अवशेष प्रबंधन, सुधार प्रणालियों का प्रयोग, कंजऱवेटरियों में जैव विभिन्नता की संभाल करके कार्बन के निकास को घटाने की तरफ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके साथ ही बोटेनिकल गार्डन और विशाल वृक्ष लगाना मुहिम के अच्छे प्रयास हैं।

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