पंजाब

राज्य में पराली जलाने वाले 2923 किसानों के विरुद्ध कार्यवाही की – कैप्टन अमरिन्दर सिंह

चिरस्थायी हल के लिए गेंद केंद्र सरकार के पाले में, प्रधान मंत्री को लिखे पत्र के सकारात्मक प्रतिक्रिया के प्रति आशावान
चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरु की गई मुहिम के अंतर्गत पंजाब में एक नवंबर तक पराली जलाने के सामने आए 20,729 मामलों में अब तक 2923 किसानों के विरुद्ध कार्यवाही की जा चुकी है। वर्ष 2018 के मुकाबले इस वर्ष ऐसे मामलों में 10-20 प्रतिशत तक की कमी आने की आशा है।पिछले वर्ष पराली जलाने के 49,000 मामले सामने आए थे जबकि इस वर्ष राज्य सरकार को अब तक प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक 20,729 मामले सामने आए हैं और 70 प्रतिशत धान की फ़सल काटी जा चुकी है।आज यहाँ से जारी एक बयान में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि हाई कोर्ट की तरफ से किसानों को बीते वर्ष किये जुर्मानों की वसूली करने पर लगाई रोक के बावजूद राज्य सरकार ने पराली को आग लगाने के ख़तरनाक रुझान के विरुद्ध ज़ोरदार मुहिम चलाई हुई है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उम्मीद ज़ाहिर करते हुए कहा कि उनकी तरफ से दिल्ली में वायु प्रदूषण से पैदा हुई अति गंभीर स्थिति बारे लिखे पत्र को प्रधान मंत्री विचारेंगे और सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस समस्या से भली भाँति परिचित है और पराली जलाने की घटनाएँ रोकने के लिए वचनबद्धता के साथ काम कर रही है।इस मुहिम के अंतर्गत गठित की गई टीमों ने एक नवंबर तक पराली को आग लगाने के 11286 घटनास्थलों का दौरा किया है और 1585 मामलों में वातावरण को प्रदूषित करने के मुआवज़े के तौर पर 41.62 लाख रुपए का जुर्माना किसानों पर लगाया है, 1136 मामलों में खसरा गिरदावरी में रैड एंट्री की और कानून का उल्लंघन करने वाले 202 मामलों में एफ.आई.आर. /कानूनी कार्यवाही अमल में लाई गई।मुख्यमंत्री ने कहा कि आग लगाने की बाकी घटनाओं की तस्दीक करने और वातावरण प्रदूषित करने का मुआवज़ा वसूलने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने बिना सुपर एस.एम.एस. के चलने वाली 31 कम्बाईनों को वातावरण प्रदूषित करने के मुआवज़े के तौर पर 62 लाख रुपए जुर्माना किया है।हालाँकि इस समस्या से निपटने के लिए यह कदम काफ़ी नहीं हैं क्योंकि पंजाब में बहुत से किसान पाँच एकड़ से कम ज़मीन के मालिक हैं जिस कारणपराली का प्रबंधन करना उनको आर्थिक तौर पर वाजिब नहीं बैठता। बीते वर्ष किसानों पर लगाए जुर्माने को वसूलने की प्रक्रिया को रोकने के समय हाई कोर्ट ने कहा था कि सीमांत किसानों के बढ़ रहे कजऱ्े और किसान आत्महत्याओं के गंभीर मसले के मद्देनजऱ किसानों की वित्तीय मुश्किलों को और न बढ़ाया जाये। अदालत ने यह भी हुक्म दिया था कि कानून के अनुसार वातावरण को नुक्सान की क्षतिपूर्ति के लिए कार्यवाही को जारी रखा जा सकता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन हालत में केंद्र सरकार की तरफ से मुआवज़ा देना ही एकमात्र हल है। उन्होंने कहा कि इस मसले को राजनीति के साथ नहीं जोड़ा जा सकता बल्कि यह हमारे लोगों के भविष्य का सवाल है जिससे राजनीति बहुत परे है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि गेंद अब केंद्र सरकार के वर्षे में है क्योंकि बहुत से राज्यों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और उनके अपने राज्य पर कजऱ्े का बोझ बहुत भारी है। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिति को जी.एस.टी. के साथ जोड़ दिया गया जिससे आर्थिक समस्याओं ने और सिर उठा लिया।पाकिस्तान की तरफ से आती हवाओं समेत पश्चिमी चक्रवात से दिल्ली में धूम कोहरा (स्मोग) के लिए पंजाब के योगदान को कबूलते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सारा दोष सिफऱ् उनके राज्य पर मढ़ देना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण के कारणों पर मापदंड दिल्ली में अधिक हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या को सुलझाने की बजाय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल राजनैतिक खेल खेल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप नेता बताएं कि इस मसले के हल के लिए वह ज़मीनी स्तर पर क्या कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि धान अधीन क्षेत्रफल बढऩे के कारणहाल ही के वर्षों में यह स्थिति और भयानक हुई है और बीते दो वर्षों में पंजाब में धान की रिकार्ड पैदावार हुई है, हालांकि राज्य के लोग परंपरागत तौर पर चावल नहीं खाते। उन्होंने बताया कि पंजाब में भी कुछ शहर धूम कोहरे की लपेट में हैं। किसानों को धान से वैकल्पिक फसलों की तरफ मोडऩे की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने फ़सलीय विविधता को उत्साहित करने के लिए बाकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की माँग को दोहराया।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार को इस मसले को अपने हाथ में लेकर संकट में से निकलने के लिए आम सहमति बनानी होगी।

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