पंजाब

डेरा बाबा नानक हलके के लिए हरसिमरत अपने ससुराल और पति के राज में किया एक भी काम गिनवाए: सुखजिन्दर सिंह रंधावा

बादलों की बहु पर संकुचित राजसी हितों के लिए धार्मिक स्थानों पर प्रकाश पर्व समागमों पर राजनीति करने का लगाया दोष

चंडीगढ़ – सीनियर कांग्रेसी नेता और कैबिनेट मंत्री स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल पर धार्मिक समागमों का सियासीकरण और 550वें प्रकाश पर्व समागमों पर राजसी रोटियाँ सेकने का दोष लगाते हुए कहा कि वह धर्म की आड़ में राजनीति करने की बादल परिवार की पुरानी आदत को आगे ले जा रही है।स. रंधावा ने डेरा बाबा नानक में करतारपुर गलियारे के काम को देखने के बहाने राजनीति करने आई हरसिमरत बादल के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उसने कहा थी कि राज्य सरकार की तरफ से कोई विकास कार्य नहीं करवाया जा रहा है। स. रंधावा ने हरसिमरत बादल को बदले में जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले ही डेरा बाबा नानक हलके के लिए 117 करोड़ रुपए के विकास कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री यह बताए कि जब राज्य में उसका ससुर मुख्यमंत्री था, पति उपमुख्य मंत्री था और भाई कैबिनेट मंत्री था तो इस हलके के लिए ख़र्च किया गया एक भी पैसा गिनवाए। यहाँ तक कि वह खुद छह सालों से केंद्रीय मंत्री है जिसने कभी भी पंजाब की तरह इस हलके की खबर नहीं ली। उन्होंने कहा कि बादल परिवार ने तो कभी इस हलके का दौरा भी नहीं किया जबकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने तो डेरा बाबा नानक में कैबिनेट मीटिंग बुलाकर अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण दिया।उन्होंने कहा कि इससे पहले बादलों ने तो कभी डेरा बाबा नानक आकर ऐतिहासिक स्थान पर माथा भी नहीं टेका और न ही करतारपुर गलिायारा खोलने की माँग की। यहाँ तक कि गलियारा खुलवाने के लिए लगातार यत्नशील रहे जत्थेदार कुलदीप सिंह वडाला को बादलों ने उस समय कमरे में बंद करवा दिया था जब वह समकालीन राष्ट्रपति को मिलने के लिए आए थे। अब राज्य सरकार द्वारा डेरा बाबा नानक से करतारपुर रास्ते की तरफ जाती सडक़ का नाम भी जत्थेदार कुलदीप सिंह वडाला के नाम पर रखा जा रहा है।स. रंधावा ने डेरा बाबा नानक हलके के सर्वपक्षीय विकास के लिए बनाए प्रोजेक्टों का जि़क्र करते हुए कहा कि डेरा बाबा नानक विकास अथॉरिटी बनाकर राज्य सरकार इस हलके की कायाकल्प कर रही है। उन्होंने कहा कि शहर का सौंदर्यीकरण, सीचेवाल मॉडल पर सिवरेज सिस्टम का सुधार, हस्पताल का नवीनीकरण, सडक़ीय ढांचे को चौड़ा और मज़बूत करना, शहर को विरासती रूप, पार्कों में एल.ई.डी. लाईटें, सोलर स्ट्रीट लाईटें, हवेली, बिजली के खंबों का नया रूप, पास के गाँवों के विकास आदि से हलके का रूप बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा इस हलके के एक और ऐतिहासिक कस्बे कलानौर को टूरिस्ट सर्किट अधीन लाया गया है और वहां डिग्री कॉलेज और गन्ना शोध केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है।स. रंधावा ने कहा कि अकाली -भाजपा के 10 सालों के कुशासन के दौरान डेरा बाबा नानक हलका विकास को तरसता रहा, तब तो हरसिमरत बादल को यह हलका याद नहीं आया। आज जब करोड़ों नानक नाम लेवा संगत की अरदास के साथ रास्ता खुलने जा रहा है और डेरा बाबा नानक हलके का सर्वपक्षीय विकास हो रहा है तो अब वह राजनैतिक रोटियाँ सेकने के लिए मग्गरमच्छ के आंसुु बहा रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को सलाह दी कि आगे से यदि यहाँ आना हो तो वह नम्र सिख के तौर पर आए और गुरू घर में अपनी श्रद्धा भेंट करे न कि राजनीति करने आए।स. रंधावा ने आगे कहा कि बादल दल अपनी खोई हुई राजसी शान को बहाल करने की नाकाम कोशिशें कर रहा है जिसके लिए वह शिरोमणी कमेटी को अपने संकुचित राजनैतिक हितों की ख़ातिर इस्तेमाल कर रहा है और श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व समागमों का सियासीकरण करने में लगा हुआ है।उन्होंने कहा कि अकाली दल की लगातार कोशिश है कि वह अपना राजसी उल्लू सीधा करने के लिए प्रकाश पर्व समागमों पर राजनीति कर रहा है। श्री अकाल तख़्त साहिब के जत्थेदार के आदेशों को नम्रता के साथ मानते हुए राज्य सरकार पूरा सहयोग दे रही है जबकि बादल दल शिरोमणी कमेटी की आड़ में राजनीति करने से बाज़ नहीं आ रहा है।

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