पंजाब

एसजीपीसी द्वारा पराली को जलाने के विरूद्ध सरकार के प्रयासों का समर्थन, श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के सत्कार के तौर पर कृषि अवशेष को न जलाने हेतु किसानों से अपील

एसजीपीसी ने गुरूद्वारा प्रबंधकों और हैड ग्रंथीयों को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक इस प्रथा संबंधी लोगों को जगारूक करने के लिए कहा
चंडीगढ़ – पर्यावरण को बचाने हेतु पंजाब सरकार और पर्यावरण प्रेमीयों के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी राज्यभर के किसानों से खुले खोतों में कृषि अवशेषों को आग न लगाने का आह्वान किया है।पंजाब कृषि विभाग के अनुरोध पर चलते हुए एसजीपीसी ने गुरूद्वारा साहिबानों के प्रबंधकों को लिखे अपने पत्र में कहा है कि इस नवंबर माह में श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के समारोहों के मद्देनज़र स्वच्छ और हरे-भरे पर्यावरण को बनाए रखना हम सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।एसजीपीसी के अतिरिक्त सचिव ने भी सभी प्रबंधकों को निर्देश दिए कि वह गुरूद्वारों की स्वामित्व वाली कृषि भूमि पर कृषि अवशेष को जलाने के विरूद्ध जारी दिशा-निर्देशों के कड़े अनुपालन को सुनिश्चित करें। एसजीपीसी ने सभी गुरूद्वारों के हैड ग्रंथीयों को बल देकर कहा कि वह किसानों को कृषि अवशेष जलाने के विरूद्ध जागरूक करें क्योंकि इस प्रथा से पर्यावरण और मानवीय स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है।मुख्य रूप से कृषि सचिव श्री काहन सिंह पन्नू ने एसजीपीसी को अनुरोध किया था कि वह गुरूद्वारों के स्वामित्व वाली भूमि पर शून्य कृषि अवशेष प्रज्वलन को सुनिश्चित करें और साथ ही खुले खेतों में कृषि अवशेषों को आग न लगाने हेतु किसानों से भी अपील करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित करना श्री गुरू नानक देव जी, जिन्होंने स्वयं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया, को उनके 550वें प्रकाश पर्व पर सही मायने में एक उपयुक्त सत्कार होगा।पन्नू ने कहा कि पंजाब सरकार और एसजीपीसी श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक समारोहों को मनाने हेेतु मैगा उत्सवों का आयोजन कर रहे हैं जहां लखों की संख्या में श्रद्धालु नत्मस्तक होने के लिए पंजाब आएंगे। उन्होंने कहा कि प्रकाश पर्व समारोहों के दौरान कृषि अवशेषों को आग लगाने की प्रथा का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जिससे मानवीय स्वास्थ्य और मिट्टी की पौष्टिकता को हानि पहुंचेगी।

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