पंजाब

नई शिक्षा नीति के लागू होने से देश की विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और पहचानों को नुकसान पहुँचने का बड़ा ख़तरा-तृप्त बाजवा

नई शिक्षा नीति में सामाजिक सरोकारों की शिक्षा देने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए
चंडीगढ़ – केंद्र सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति सम्बन्धी जारी किये गए मसौदे संबंधी कई तरह के अंदेशे ज़ाहिर करते हुए पंजाब के उच्च शिक्षा मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने आज यहाँ ग़ैर सहायता प्राप्त कॉलेजों की साझी एक्शन कमेटी द्वारा करवाए गए सैमीनार के मौके पर अध्यक्षयीय भाषण देते हुए कहा कि इस नीति के लागू होने से सबसे बड़ा ख़तरा मुल्क की विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और पहचानों को नुकसान पहुँचने का ख़तरा है। उन्होंने कहा कि इस नीति से संविधान में भारत को एक लोकतांत्रिक, गणराज्य, न्यायशील, सभ्यक, समानता वाले मुल्क के निर्माण करने को तो दोहरा दिया गया है, परन्तु इसमें से धर्म निरपेक्ष शब्द छोड़ देने से मुल्क की धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को दरकिनार किया जा रहा है।स. बाजवा ने कहा कि नयी शिक्षा नीति पंजाबियों की सोच को नुकसान पहुँचाने की एक सोची समझी साजिश के अंतर्गत थोपी जा रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि इस नीति का मसौदा देश की बाकी भाषाओं में तो छापा गया है, परन्तु पंजाबी भाषा में नहीं जो कई तरह की शंकाएं पैदा करता है।श्री बाजवा ने कहा कि नयी शैक्षिक नीति में शिक्षा के हर पक्ष का केंद्रीयकरण करने की वकालत की गई है, जिससे शिक्षा राज्यों के अधिकार क्षेत्र में से निकल जायेगी। उन्होंने कहा कि मुल्क में समान शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति और भाषा पक्ष से हर राज्य की अपनी शैक्षिक ज़रूरतें हैं जो शिक्षा केंद्रीयकरण के साथ नजऱअन्दाज हो जाएंगी।स. बाजवा ने बाकी राज्यों से भी नयी शिक्षा नीति के खि़लाफ़ खुलकर सामने आने और आवाज़ उठाने की अपील की जिससे हमारी क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृतियों की होंद बचायी जा सके।स. बाजवा ने नयी शिक्षा नीति संबंधी अपने सुझाव देते हुए कहा कि नयी शिक्षा नीति सरल, गरीब समर्थकी और सरकारी संस्थाओं को मज़बूत करने वाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा इस नीति में अधिक बंदिशें नहीं होनी चाहीए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति में सामाजिक सरोकारों की शिक्षा देने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।स. बाजवा ने इस मौके पर कहा कि पंजाब सरकार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में नयी शिक्षा नीतियों की ख़ामियों को दूर करने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने राज्य के शिक्षा विद्वानों को कहा कि नयी शिक्षा नीति की ख़ामियों संबंधी अपने सुझाव लिखित रूप में ज़रूर भेजें जिनका प्रारूप तैयार करके मुख्यमंत्री के साथ विचारने के उपरांत केंद्र सरकार के पास ज़ोर-शोर से यह मसला उठाया जायेगा। इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री ने नौजवानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के रोजग़ार के साथी बनाने के लिए निजी शैक्षिक संस्थाओं से अपील की कि वह व्यापारीकरण की बजाय मानक शिक्षा प्रदान करने की तरफ ध्यान दें।इससे पहले नयी शिक्षा नीति संबंधी महाराजा रणजीत सिंह यूनिवर्सिटी के उपकुलपति डा. मोहनपाल सिंह ईशर, बाबा फऱीद यूनिवर्सिटी के उपकुलपति डा. राज बहादर, मोदी कॉलेज पटियाला के प्रिंसिपल डा. खुशविन्दर कुमार, दोआबा ग्रुप के डायरैक्टर जनरल डा. दलजीत सिंह ने भी नयी शिक्षा नीति की ख़ामियाँ और इसके बुरे निष्कर्षों संबंधी विस्तार में अपने विचार पेश किये।इस मौके पर ग़ैर सहायता प्राप्त कॉलेज़ों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन श्री अश्वनी शेखड़ी, श्री रमन भल्ला और स. अजीत इन्दर सिंह मोफर पूर्व विधायक भी मौजूद थे। इनके अलावा ग़ैर सहायता प्राप्त कॉलेज़ों की साझी एक्शन कमेटी के मैंबर डा. जे.एस. धालीवाल, श्री जगजीत सिंह, श्री जसनीक सिंह, श्री सतविन्दर सिंह, डा. अंशु कटारिया, श्री रजिन्दर सिंह धनोआ, श्री चरनजीत सिंह वालिया, श्री सुखविन्दर सिंह च_ा, श्री निर्मल सिंह, श्री शिमंशू, डा. विक्रम शर्मा, डा. अमरजीत सिमघ वालिया और डा. गुरमीत सिंह धालीवाल भी मौजूद थे।

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