पंजाब

‘पशु पालकों को मानक चारा और फीड बरतने की सलाह’
पशुओं को फफूँद लगी फीड और गला-सड़ा अनाज न दिया जाये-डायरैक्टर पशु पालन
चंडीगढ – पंजाब के पशु और मछली पालन और डेयरी विकास मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने मोहाली के नज़दीकी गाँवों में बड़ी संख्या में पशु मरने की घटना को अफ़सोसजनक बताते हुए आज यहाँ कहा है कि इस घटना की चल रही जांच में उनके विभाग की कोई कोताही सामने आने की सूरत में जिम्मेंवार व्यक्तियों के विरुद्ध बनती कार्यवाही की जायेगी। इसके साथ ही उन्होंने पशु पालकों ख़ास कर डेयरी फार्म चला रहे किसानों को अपील की है कि वह अपने पशुओं की खुराक का ख्याल रखें।श्री बाजवा ने पशु पालकों को सलाह दी कि वह अपने पशुओं को गुरू अंगद देव वैटेनरी यूनिवर्सिटी के माहिरों द्वारा बताए गए अनुसार ही चारा और ख़ुराक डालने और होटलों-ढाबों से बचा-खुचा खाना डालने से गुरेज़ करें। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में पशुओं की ख़ुराक का ख़ास ख्याल रखना चाहिए क्योंकि इस मौसम में चारे और अन्य खाद्य पदार्थों को जल्दी फफूँद लग जाती है जो पशुओं की जान के लिए खतरा बन सकती है।इसी दौरान पशु पालन विभाग के डायरैक्टर डा. इन्द्रजीत सिंह ने पशु पालकों को पशुओं के दाने और फीड को सिल से बचा कर रखने की सलाह दी है क्योंकि नमी से ख़ुराक में माइकोटोक्सिन (फफूँद) पैदा हो जाती है जो पशुओं के लिए घातक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि खऱाब हुआ अनाज, जिसको आदमियों के खाने के लिए योग्य नहीं समझा जाता, अक्सर ही पशओं और मुर्गों को डाल दिया जाता है जो बहुत ही ग़ैर-सेहतमंद रुझान है। उन्होंने कहा कि इस खऱाब अनाज का पशुओं ख़ास कर भैंसों की स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।डा. इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि ज़हरीली फफूँद से रोकथाम के लिए पशुओं को मानक ख़ुराक डाली जाये, कमरा हवादार हो और ख़ुराक एवं पानी के लिए साफ़ बर्तन इस्तेमाल करने चाहिए हैं। ख़ुराक को स्टोर करने और ढुलाई की अच्छी सुविधाएं हों जिससे नमी से बचाव हो सके। उन्होंने कहा कि अगर चारे या फीड को फफूँद लग जाये तो इनको पशुओं को डालने की बजाय नष्ट कर देना चाहिए।

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