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कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत की बड़ी जीत

कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. अदालत ने फैसला सुनाते हुए जाधव की फांसी पर रोक बरकरार रखी है और पाकिस्तान को इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है. अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के कुल 16 जजों में से 15 ने भारत के पक्ष में फैसला दिया है. अब पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को फांसी नहीं दे सकता है. अदालत ने जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराने को भी कहा है. फैसले का चारों ओर स्वागत हो रहा है और देश में जश्न का माहौल है.द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले पर पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनिया की निगाहें लगी हुई थीं. शाम करीब साढ़े छह बजे जब 16 जजों की पीठ ने फैसला सुनाना शुरू किया और कुछ ही देर में ये साफ हो गया कि दुनिया की सबसे बड़ी अदालत में भारत को कुलभूषण जाधव के मामले में बड़ी जीत हासिल हो गई है. अंतरराष्ट्रीय अदालत ने न केवल भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर रोक को बरकरार रखा, बल्कि जाधव को राजनयिक पहुंच देने की भारत की मांग को स्वीकार किया.फैसले पर विस्तार से बात करें तो अंतराष्ट्रीय अदालत ने कहा है कि जाधव की फांसी की सज़ा पर तब तक रोक बरकरार रहेगी, जब तक पाकिस्तान अपने फैसले की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार नहीं कर लेता. कोर्ट ने पाकिस्‍तान को उसकी सजा पर फिर से विचार करने और उसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया है. अदालत ने जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराने को भी कहा है.अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान में अब तक इस मामले में रहम की प्रक्रिया को भी सही नहीं माना है. अदालत ने माना है कि वियना समझौते के नियम इस मामले में लागू होते हैं. अदालत ने माना है कि इस मामले में वियना संधि का उल्लंघन हुआ है. कोर्ट ने कहा वियना संधि का आर्टिकल-36 इस मामले में लागू होता है और इसका उल्लंघन हुआ है.कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान ने जाधव की गिरफ्तारी के बारे में भारत को फौरन जानकारी देने में विफल रहा. आईसीजे ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत को कुलभूषण जाधव से संपर्क करने और उन्हें हिरासत में रखकर उन्हें किसी से मिलने के और अपने कानूनी प्रतिनिधित्व के लिए व्यवस्था करने के अधिकार से वंचित किया. पाकिस्तान ने इस तरह से वियना कन्वेंशन के तहत दायित्वों का उल्लंघन किया है .अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले का भारत में जोरदार स्वागत हो रहा है. केंद्र सरकार, तमाम राजनीतिक दलों के साथ ही विभिन्न संगठनों ने इसे भारत की बड़ी जीत करार दिया है.गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना की अदालत ने अप्रैल, 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोपों पर भारतीय नागरिक जाधव को मौत की सजा सुनाई थी. भारत ने इस फैसले के खिलाफ उसी साल मई में आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था. आईसीजे की 10 सदस्यीय पीठ ने 18 मई, 2017 में पाकिस्तान को मामले में न्यायिक निर्णय आने तक जाधव को सजा देने से रोक दिया था. पाकिस्तान का दावा है कि जाधव कथित रूप से ईरान से घुसे थे. हालांकि भारत का कहना है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया, जहां वो कारोबार के सिलसिले में गए थे. भारत का कहना था कि पाकिस्तान ने जाधव तक राजनयिक संबंधी पहुंच से बार-बार इनकार कर राजनयिक रिश्तों से संबंधित 1963 की विएना संधि का ”घोर उल्लंघन” किया है.

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