इंग्लैंड के हाथों सेमीफ़ाइनल में मिली हार ने ना सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के लगातार छठी बार विश्व चैंपियन बनने की उम्मीदों को तोड़ दिया बल्कि 44 वर्षों का इतिहास भी पलट दिया। 1975 में क्रिकेट विश्व कप शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है जब ऑस्ट्रेलिया को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा है। ‘डीडी न्यूज खेल संवाददाता सुचित्रा भारद्वाज की रिपोर्ट’.गुरुवार को एजबेस्टन में खेले गए दूसरे सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस हार का मतलब है कि आठ बार सेमीफ़ाइनल में पहुंची ऑस्ट्रेलिया को पहली बार अंतिम चार की स्टेज पर शिकस्त मिली। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 1975, 1987, 1996, 2003, 2007 और 2015 में सेमीफ़ाइनल में जीत दर्ज की थी वहीं 1999 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनका सेमीफ़ाइनल मैच टाई रहा था।ऑस्ट्रेलिया ने 1987, 1999, 2003, 2007 और 2015 में पांच बार विश्व कप अपने नाम किया है। वहीं इंग्लैंड की टीम 1992 के बाद पहली बार 50 ओवर के विश्व कप के फ़ाइनल में पहुंची है। 1992 में इंग्लैंड को फ़ाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। उससे पहले इंग्लैंड ने 1979 और 1987 के फ़ाइनल में जगह बनाई थी। वहीं दूसरी तरफ न्यूज़ीलैंड की टीम 8 बार सेमीफ़ाइनल खेल चुकी है और सिर्फ दूसरी बार सेमीफ़ाइनल में पहुंची है।न्यूज़ीलैंड की टीम 2015 में भी फ़ाइनल में पहुंची थी जहां उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। रविवार को होने वाला फ़ाइनल क्रिकेट विश्व कप के इतिहास में चौथा मौका होगा जब दो ऐसी टीमें आमने-सामने होंगी जिन्होंने कभी विश्व कप नहीं जीता है। इससे पहले 1975 में वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया, 1987 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड और 1992 में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच हुआ फ़ाइनल भी दो ऐसी टीमों के बीच खेला गया था जिन्हें पहली बार विश्व कप जीतने का मौका मिला था। अगर इंग्लैंड फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को हरा देता है तो वो भारत और ऑस्ट्रेलिया के बाद अपने घर में क्रिकेट विश्व कप जीतने वाला तीसरा देश बन जाएगा। भारत 2011 में विश्व कप जीतकर चैम्पियन बनने वाली पहली मेज़बान टीम बनी थी।