पंजाब

रोपड़ पुलिस द्वारा राज्य-व्यापी वाहन घोटाले का पर्दाफाश, अब तक 2 लोग गिरफ्तार और 93 वाहन ज़ब्त

शुरूआती जांच में परिवहन विभाग के कुछ कार्यालयों की मिलीभगत का चला पता
रोपड़ – रोपड़ पुलिस ने करोड़ों रूपए के एक राज्य-व्यापी वाहन घोटाले का पर्दाफाश किया है जोकि कथित तौर पर फतेहगढ़ साहिब, तरन तारन, संगरूर और मोगा स्थित परिवहन विभाग के कार्यालयों की मिलीभगत से चलाया जा रहा था।शनिवार को इस संबंधी जानकारी देते हुए रोपड़ के एसएसपी स्वपन शर्मा ने बताया कि अब तक राज्य में गैर-कानूनी ढंग से चल रहे कुल 93 वाहनों को ज़ब्त किया गया है जिनकी कीमत 4 करोड़ रूपए है।उन्होंने आगे बताया कि पुलिस द्वारा इस घोटाले में अब तक गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों से न$कली आधार कार्ड भी बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस घोटाले में दिल्ली, होशियारपुर, संगरूर और पटियाला के कार डीलर भी शामिल हैं।उन्होंने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि इस घोटाले के तहत एक बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था जो एक राज्य से पुराने वाहन खरीदने के बाद इनके चैसी और इंजन नंबर बदलकर दूसरे राज्यों के कार डीलरों को बेचा करता था। शर्मा ने कहा कि ज़ब्त किए गए अधिकतर वाहनों के विरूद्ध उनके खरीदे गए राज्य में ऋण बकाये हैं। उन्होंने आगे कहा कि जांच के दौरान एक ही न$कली आधार कार्ड पर कई वाहनों के पंजीकृत होने का भी पता चला है।इस घोटाले के बारे में पुराने वाहनों का एक बड़ा बैच, जिनको महाराष्ट्र से बहुत ही कम कीमत पर खरीदा गया था, की बरामदगी होने के बाद हुआ है। विभिन्न राज्यों के कार डीलरों द्वारा लगभग 5000 टोयोटा कंपनी के वाहन उठाए गए थे जिनमें से लगभग 500 वाहन पंजाब पहुंचे थे।यह संगठित गिरोह सभी सरकारी नियमों, प्रक्रियाओं और करों की उपेक्षा करने के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेजों को जमा करवाए बिना पुराने वाहनों को जिला परिवहन कार्यालयों में कार्यरत क्लर्कों की मिलीभगत से नए वाहनों के तौर पर पंजीकृत करवाया करता था।शर्मा ने आगे बताया कि शुरूआती जांच में केन्द्र सरकार के संबंधित विभाग द्वारा तैयार किए गए केन्द्रीकृत डेटा में खामियों के साथ-साथ ‘वाहन 3’ और ‘वाहन 4’ सॉफ्टवेयर में भी कमीयों का पता चला है जिनका इस्तेमाल यह गिरोह चालाकी से अपने लाभ के लिए कर रहा था।पिछले दो वर्षों से सक्रिय यह गिरोह मुख्य रूप से मध्यम आय वर्ग के लोगों को लूट रहा था। रोपड़ पुलिस इस घोटाले से हुए नुक्सान का पता लगाने के लिए परिवहन विभाग और अन्य जिलों के साथ संपर्क में है।

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