250 स्वादिष्ट भोजन-पदार्थ के लगाए गए स्टॉल
चंडीगढ़ – आपसी सांस्कृतिक समझ को गहरा बनाने के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए फ्रैंकफर्ट में भारत के कॉन्सुलेट जनरल ने कोलोन के ऐतिहासिक शहर में इंडीन फेस्ट नामक एक विशाल सांस्कृतिक नाटक का आयोजन किया।भारतीय ऐसोसिएशनों के सहयोग और कोलोन शहर के अधिकारियों के सहयोग से आयोजित इंडीन फेस्ट ने विदेशी पर्यटकों, स्थानीय जर्मन नागरिकों और नोर्थ राईन वेस्टफेलिया (एनआरडब्ल्यु) क्षेत्र के भारतीय समुदाय सहित बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित किया। इस फेस्ट का आयोजन कोलोन के केंद्र में स्थित नेउमार्कट में किया गया, जिसमें बहुत से पर्यटक शामिल हुए और उन्होंने भारतीय संगीत और फूड स्टॉलों का खूब आनंद लिया।कोलोन की डिप्टी मेयर एल्फी शॉ-एंटवप्र्स ने मुख्यअतिथि के रूप में फेस्ट के आधिकारिक भाग का उद्घाटन किया। उन्होंने कोलोन में रहने वाले भारतीय समुदाय की प्रशंसा की और उन सबको एक साथ लाने के लिए कॉन्सुलेट के प्रयासों की प्रशंसा की।महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों के नृत्य और संगीत परंपराओं को पेश करते हुए 30 से अधिक सांस्कृतिक नाटकों का प्रदर्शन किया गया। बॉलीवुड संगीत के साथ-साथ क्लासिकल डांस परफॉरमेंस का आनंद लेते हुए वहां मौजूद दर्शक तालियां बजाते हुए नाचे।एनआरडब्ल्यु क्षेत्र में स्थित कई भारतीय ऐसोसिएशनों ने इस फेस्ट के दौरान फूड स्टॉल भी लगाए जहाँ 250 से अधिक विभिन्न प्रकार के व्यंजन मौजूद थे। भारत के विभिन्न क्षेत्रों के इन व्यंजनों के लिए वहां उपस्थित लोगों के बीच भारी उत्साह देखा गया, जिनका स्वागत पारंपरिक भारतीय रीति से तिलक लगाकर और एक स्थानीय भारतीय मिठाई के साथ किया गया।साड़ी बांधने संबंधी सेशन, मेंहदी के स्टॉल और ताजमहल के कट-आउट वाले फोटो बूथ इस फेस्ट के प्रमुख आकर्षण थे।कार्यक्रम में सरोद, सितार और तबले की प्रसिद्ध वादक तिकड़ी महाराज ट्रायो द्वारा प्रदर्शन किया गया। इस तिकड़ी के तीनों संगीतकार जिसमें पिता और दो बेटे हैं, भारत के उत्तर में स्थित वाराणसी के एक संगीत परिवार से संबंध रखते हैं जिनकी मौखिक प्रसारण में संगीत परंपरा लगभग 500 साल पुरानी है।भारतीय ऐसोसिएशनों ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों के भारतीय हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए जिनके लिए उपस्थित लोगों के बीच भारी उत्साह देखने को मिला। कोलोन में बड़े स्तर पर पहली बार आयोजित इंडीन फेस्ट में भारत ऐसोसीएशनों द्वारा आलौकिक तरीके से अपनी सांस्कृतिक विविधताओंं के ज़रिये एकता में अनेकता को प्रदर्शित किया गया।