पंजाब

जेल मंत्री ने सुखबीर बादल को चि_ी लिखकर दी चुनौती

पूर्व गृहमंत्री को यदि जेल मैनुअल पता होते तो लुधियाना जेल घटना संबंधी बेतुका बयान न देता: रंधावा

चंडीगढ़ – लुधियाना केंद्रीय जेल में कैदियों द्वारा हिंसा पर टिप्पणियाँ करके राजनैतिक रोटियाँ सेकने वाले अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को चिी लिखकर जेल मंत्री स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने चुनौती देते हुए कहा है कि यदि पूर्व गृह मंत्री को जेल मैनुअल बारे पता होता तो वह उनका इस्तीफ़ा माँगकर अपनी अज्ञानता को प्रकट न करते।स. रंधावा ने पूर्व उप-मुख्यमंत्री को चिी लिखते हुए कहा है कि यदि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जेल मैनुअल नहीं पढ़े तो वह अब जेल मैनुअल की धारा 363 से 367 पढ़ लें (जिसको पत्र के साथ नत्थी किया है) जिसमें स्पष्ट लिखा है कि जेल में किसी भी दुखद घटना से निपटने के लिए हथियार चलाने हेतु जेल अधिकारियों को पूर्ण अधिकार होते हैं।स. रंधावा ने कहा कि सुखबीर बादल ने लुधियाना में कैदियों द्वारा हिंसा के उपरांत की गोलाबारी की तुलना बहबल कलाँ गोली कांड के साथ करके सिख कौम की तौहीन की है जिसके लिए वह समूची सिख कौम से माफी माँगे। उन्होंने कहा कि बहबल कलाँ में शांतमयी तरीके से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के बेअदबी के दोषियों को पकडऩे की माँग करने वाले गुरबानी कीर्तन कर रहे सिखों की तुलना कैदियों के साथ बिल्कुल नहीं की जा सकती। अकाली दल के प्रधान द्वारा ऐसी की गई तुलना कतई हज़म होने वाली बात नहीं।सीनियर कांग्रेसी नेता ने अकाली दल प्रधान को यह भी याद करवाया है कि कैसे पिछली अकाली -भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान गैंगस्टर जेलों में से भागते रहे। उन्होंने कुछ पिछली घटनाओं के विवरण देते हुए सुखबीर सिंह बादल को याद करवाते हुए कहा कि नाभा जेल में से विक्की गौंडर समेत कई गैंसस्टर फऱार हुए थे जिनको पकडऩे में सरकार नाकाम रही। 2015 में बठिंडा जेल में गोली चलने से दो कैदी जख़़्मी हुए। इस घटना में बदनाम अपराधी गुरजीत सिंह महलकलां शामिल था। इसी तरह 2016 में फिर बठिंडा जेल में हिंसा हुई। 2011 में कपूरथला जेल में हिंसा हुई। अमृतसर जेल में तीन बार (7 जनवरी 2008, 31 जनवरी 2008 और 29 अगस्त 2008) दंगे हुए।पंजाब की जेलों में सी.आर.पी.एफ. तैनात किये जाने सम्बन्धी जेल मंत्री ने कहा कि उनकी तरफ से पहले ही इसकी माँग की जा चुकी है जिस सम्बन्धी 8 अक्तूबर 2018 को केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया गया था। उन्होंने सुखबीर बादल को कहा कि वह केंद्र सरकार में सहयोगी है और यदि वह सचमुच पंजाब की जेलों की सुरक्षा संबंधी चिंतित हैं तो अपने सहयोगियों को कह कर पंजाब की उच्च सुरक्षा जेलों में सी.आर.पी.एफ. की तैनाती करवाएं।अंत में स. रंधावा ने सुखबीर सिंह बादल को कहा कि उनकी तरफ से लिखे इस पत्र की किसी भी दलील संबंधी यदि कोई स्पष्टीकरण लेना हो तो वह ले सकते हैं ताकि उनके ज्ञान में और वृद्धि हो सके।

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