पंजाब

मुख्यमंत्री द्वारा शहरी स्थानीय संस्थाओं को और अधिक स्वायत्तता देने के लिए व्यापक ढांचा तैयार करने के निर्देश

अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए एकमुशत निपटारा स्कीम का जायज़ा लेने के लिए स्थानीय निकाय मंत्री को कहा
चंडीगढ़ – शहरी स्थानीय संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश के तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने डायरैक्टर स्थानीय संस्थाओं को निर्देश दिए हैं कि वह इनको और ज़्यादा शक्तियां देने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करें। इस दौरान उन्होंने अनाधिकृत निर्माणों और इमारती उल्लंघनाओं को नियमित करने के लिए एकमुशत निपटारा नीति का जायज़ा करने के लिए स्थानीय निकाय मंत्री को निर्देश दिए हैं।अरबन रिनीऊअल एंड रिफोरमज़ कनसलटेटिव ग्रुप की पहली मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शहरी स्थानीय संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता मुहैया करवा के किसी भी सार्वजनिक प्रोजैक्ट में शामिल विभिन्न विभागों के बीच बिना किसी अड़चन के तालमेल को यकीनी बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कामों में फंडों की कोई भी कमी नहीं आने दी जायेगी।
मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर लाभपात्रियों को सरकारी लाभ पहुँचाने को यकीनी बनाने के लिए सभी शहरी स्थानीय संस्थाओं के वित्तीय और प्रशासकीय घटकों में आगे और सुधार लाने के लिए तुरंत कदम उठाने के लिए निर्देश दिए हैं ।मुख्यमंत्री ने एकमुशत निपटारा स्कीम के सम्बन्ध में स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिन्द्रा को मौजूदा स्कीमों पर निगरानी करने और ज़रूरत के अनुसार इनमें तबदीलियाँ लाने संबंधी सुझाव देने के लिए कहा है जिससे इनको और अधिक जन समर्थकी और नतीजा प्रमुख बनाया जा सके। उन्होंने कॉर्पोरेशनों के मेयर द्वारा प्रगटाई गई चिंताओं के संदर्भ में यह निर्देश जारी किये ।प्रोजैक्टों में देरी के सम्बन्ध में चेतावनी देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने विभाग को कहा कि वह सभी सार्वजनिकप्रोजैक्टों को मुकम्मल करने में पीछे रह चुकी निजी कंपनियों को कानूनी नोटिस जारी करें। मुख्यमंत्री ने प्रोजैक्टों को समय पर और मानक के पूरे मापदण्डों के साथ मुकम्मल कराने को यकीनी बनाने के लिए एक ढंग विकसित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है जिससे प्रोजेक्टों के लिए दिए गए फंडों के अधिक से अधिक प्रयोग को यकीनी बनाया जा सके ।अमरुत स्कीम के लिए अटल मिशन के तहत प्रगति पर तसल्ली प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के तीन अन्य शहरों को इस स्कीम के तहत लाने के लिए वह जल्द ही केंद्र सरकार को एक पत्र लिखेंगे। उन्होंने विभाग को कहा कि वह पंजाब के सभी प्रमुख शहरों की जनसंख्या घनत्व के अनुसार मापदंड तैयार करें जिनका अन्य राष्ट्रीय शहरों की जनसंख्या के साथ तुलना की जाये जिससे इस सम्बन्ध में केंद्र के आगे मज़बूत केस रखा जा सके और समूचे विकास के लिए उचित फंड जारी करवाए जा सकें ।मीटिंग के दौरान पटियाला कॉर्पोरेशन के मेयर ने मुख्यमंत्री को विनती की कि वह ओ.टी.एस नीति में मौजूदा कमियों को दूर करवाऐं और इसको और अधिक असरदार बनाऐं जिससे सभी दावेदारों में भरोसा पैदा किया जा सके।अमृतसर कॅार्पोरेशन के मेयर ने भी इमारतों को सुरक्षित बनाने के लिए ओ.टी.एस. नीति के सभी घटकों को इकठ्ठा करने को यकीनी बनाने के लिए स्थानीय संस्थाओं अथॉरिटी से अपील की है ।इससे पहले सी.ई.ओ. जल स्रोत और सिविरेज बोर्ड अजोए शर्मा ने शहरी इलाकों में चल रहे विभिन्न बुनियादी ढांचों संबंधी विस्तृत पेशकारी की। अमरुत स्कीम, जिस अधीन जिसकी कुल लागत 2766.63 करोड़ रुपए है, में भारत सरकार का हिस्सा 1204.67 करोड़ रुपए है जबकि बाकी राज्य सरकार द्वारा मुहैया करवाया जा रहा है ।गौरतलब है कि इस महीने के शुरू में मुख्यमंत्री ने नौ विशेषिकृत ग्रुप गठित किये थे जिनको सरकारी प्रोग्रामों में किसी भी तरह की तबदीली के लिए सुझाव देने का कार्य सौंपा था। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शहरी कायाकल्प और सुधार प्रोग्राम और नशा विरोधी मुहिम का नियंत्रण अपने पास रखा है ।मुख्यमंत्री ने ऐलान किया था कि ग्रुप की महीने में दो मीटिंगें हुआ करेंगी जिससे प्रोजेक्टों पर निरंतर निगरानी रखी जा सके ।मीटिंग में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिन्द्रा, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पी.डबल्यू.डी. मंत्री विजय इंदर सिंगला, खाद्य और सप्लाई मंत्री भारत भूषण आशु, आवास और शहरी विकास मंत्री सुखबिन्दर सिंह सरकारिया, ए.सी.एस. उद्योग और वाणिज्य विन्नी महाजन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह और डायरैक्टर स्थानीय निकाय करनेश शर्मा के अलावा सभी चार कॉर्पोरेशन कस्बों के विधायक और मेयर उपस्थित थे ।

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