कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था मंगलवार को दिल्ली से रवाना हो गया। इस साल 18 दल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाएंगे, प्रत्येक दल में 60 तीर्थ यात्री होगें। 3 हजार से अधिक आवेदन आये थे। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए मंगलवार को दिल्ली से पहला जत्था रवाना हुआ। कैलाश मानसरोवर यात्रा दो मार्गों- उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला दर्रे के जरिए होती है। इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रियों के 18 जत्थे भेजे जाएंगे और हर जत्थे में 60 श्रद्धालु शामिल होंगे। अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थ यात्रियों के पहले जत्थे को नई दिल्ली से शुभकामना संदेश के साथ रवाना किया।इस मौके पर उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरुरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दल के साथ एक लाइजन अफसर रहेंगे जो सभी तरह की सुविधा का ध्यान रखेंगे। 1981 से शुरु हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा में छोटा जत्था हुआ करता था लेकिन बदलते वक्त के साथ इसमें देश के कोने-कोने से लोग इस यात्रा में जाना चाहते है।इस साल अठ्ठारह जत्था बनाया गया है प्रत्येक दल में साठ तीर्थयात्री है। दस दल नाथुला दर्रे स 25 जून को रवाना होगा। इस साल तीन हजार से अधिक आवेदन आया था। अब ज्यादा से ज्यादा तीर्थ यात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाना चाहते है। यात्रा का कुछ हिस्सा चीन से होकर गुजरता है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस यात्रा में चीन सरकार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इसे आपसी रिश्तों को बेहतर करने की दिशा में अहम कदम बताया। इस कठिन यात्रा के लिए शारीरिक रुप से फीट होना और स्वस्थ्य होना एक पहली शर्त होती है और पहले जत्थे के यात्री इस यात्रा का हिस्सा होने पर बहुत खुश है।